1.मुट्ठी भर चाँदनी पहेले रोज़ खिड़की पर आता था रात रात हमसे बतियाता था भोर की रश्मि आने पर भी हमे न छोड़ के जाता था आज कल हमे देख कर बादलों के पीछे छुप जाता है अक्सर नज़र भी नही आता है कोई गुनाह तो नह… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: 1.मुट्ठी भर चाँदनी पहेले रोज़ खिड़की पर आता था रात रात हमसे बतियाता था भोर की रश्मि आने पर भी हमे न … more →