mehhekk wrote 1 year ago: झुरियाँ “डाकिया” आवाज़ सुन दौड़ के जाना चाहती आँगन थके हुए कदम रुक रुक कर ही चलते थैले … more →
mehhekk wrote 1 year ago: है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास का कुछ भी दिखाई नही दे रहा झुंझलाहट,क़ैद का आभास अंधेरों में … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कभी ख़त्म ना होनेवाला रेगिस्तान हो जैसे अक्सर हमे जीवन के पल प्रतीत होते है ऐसे उँचे तूफ़ानो के बवंड … more →
mehhekk wrote 1 year ago: पहला प्यार जब भी देखूं तुम्हारी आँखों में याद आते हैं वो गुजरे गुलाबी लम्हें पहला प्यार जो हमार … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नीले नभ की छुपी नीलाई शामल घटाए उस पर छाई बदरा उमड़ घूमड़ कर आई अपनी संगिनी को रहे पुकार इठलाती,बलखा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: जीवन का एक और पन्ना पलट गया अगला अध्याय लेकर आया, एक और साल नया पिछला जो अच्छा है ,उसको साथ लेकर चलन … more →