हम सब बंधे हुए है एक न दिखाई देनेवाले छोर से हम महसूस करते है,मानते है आत्मा में उनका निवास है सुख हो या दुख मन में कोलाहल हो या शांति सदा हमारे संग चले राह दिखाए भटके गर हम आपने निर्मल व्यवहार से करु… more →
mehekविनय wrote 3 months ago: सहर-ब-सहर1 मैं ढूँढ़ता रहा शुआएँ2 कहाँ छिप गयीं नूर-सी रोशन निगाहें न कोई घर रहा मेरा न कोई ठिकाना म … more →
दरभंगिया wrote 4 months ago: मुझे लगता है इसे और सुन्दर बनाया जा सकता है परन्तु अभी सूझ नहीं रहा. ड्राफ्ट में रख सकता था फिर कोई … more →
विनय wrote 7 months ago: तुम दुआ करो अपने प्यार के लिए मैं दुआ करूँ अपने प्यार के लिए, फिर देखें दुआ किसकी क़बूल होती है! शाय … more →
amit wrote 1 year ago: Dear Friends, Do this small prayer before entering office. … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब हुनर मैं भी जानता हूँ यह ख़ाब कच्चे तागे-सा है मगर सुबह टूट ज … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं जब दुआ करूँ तुम आमीन कहो और दुआ क़ुबूल हो जाये शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३ … more →
विनय wrote 1 year ago: कितने दिन हुए कोई टूटता सितारा नहीं देखा मेरे हश्र को एक यह बुनियाद और सही… क्या तू अब भी मुझे … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरा दर्द मेरा दु:ख मेरा अपना है बाक़ी सब झूठ है यह सच्चा सपना है कल तक लबों पर उसके लिए दुआ थी आज दु … more →
विनय wrote 1 year ago: तू कर यह वादा भी मेरे अल्लाह तू संग न होगा तू है भी अगर किसी बुते-संग में तू संग न होगा तेरी मर्ज़ी स … more →
विनय wrote 1 year ago: गिर जायेगा इस बरसात में घर तुम हो उधर हम हैं इधर जंगल ही जंगल है सब वीराना-सा जिस सिम्त दौड़ती है नज़ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हम सब बंधे हुए है एक न दिखाई देनेवाले छोर से हम महसूस करते है,मानते है आत्मा में उनका निवास है सुख ह … more →
विनय wrote 1 year ago: It was a beautiful dusk When I was at my threshold And waiting for Opening of your door Moon was mov … more →
विनय wrote 1 year ago: एक मुलाक़ात की इल्तजा है उससे दुआ है वह क्यों नहीं मिलता मुझसे उसे क्या शुबा है मुझ मुरीद को न क़रार ह … more →
विनय wrote 1 year ago: इक मौक़ा दो तुम मुझे कि बता सकूँ कितना टूटकर प्यार करता हूँ तुमसे तुम्हें जो चाहिए सब दूँगा मैं प्यार … more →