फैली-पसरी, श्वेत मखमली चादर मे, एक ही रंग दिखता है, श्वेत-श्याम एक-दूजे संग, देखो कितना जचता है… एक रंग मुझे, बंद आँखों से भी, स्पष्ट दिखता जाता है, सारे रंगों को जो, फीका करता जाता है, जब सुर्ख… more →
NidhiKM...Dil Se...Life is not fair...You never know...Hai na...Tum jo bhi ho,sirf tumhare karana ho...Nidhi KM wrote 20 hours ago: फैली-पसरी, श्वेत मखमली चादर मे, एक ही रंग दिखता है, श्वेत-श्याम एक-दूजे संग, देखो कितना जचता है … more →
Nidhi KM wrote 1 week ago: सड़क के गढ्ढों मे, डोलता हुआ, आटो चला जा रहा था, एक स्टॉप मे, नवयुवती के चढ़ते ही, सारी नज़रे उस पर … more →
Nidhi KM wrote 1 month ago: दीपावली की रात… एक घर मे… छोटी-छोटी बेटियाँ, माँ का हाथ बटा रही है, घर मे रंग-रोगन कर, प … more →
Nidhi KM wrote 3 months ago: 1) पहले :- बिन दस्तक, बिन आहट के, तुम मेरे दिल तक आए, कुछ यूँ समाए की, दूजी, सारी दस्तकें, सारी आहटे … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: हम तेरे इंतज़ार के आदि है, ये जानकार तुम, ना जाने कब तक इंतज़ार कारवाओगे? इस इंतज़ार मे ही जीना है, … more →
Nidhi KM wrote 2 weeks ago: मुझे नही पता, कब-कैसे तुम, मेरी ज़िंदगी मे आए, पता है तो, बस इतना, तुम्हारे आने से, हर मौसम को जिया … more →
Nidhi KM wrote 4 weeks ago: एक कमरा सपनो भरा, फर्श मखमली, छत सितारों भरीं, दीवारें रंगों सजीं, खिड़कियाँ फूलों रंगीं, सपने कहीं … more →
Nidhi KM wrote 1 month ago: कदमों से कदमों को, मिलाने की बहुत कोशिश की, कभी मैं आगे बढ़ गयी, कभी तुम पीछे रह गये, बातों को बातों … more →
Nidhi KM wrote 2 months ago: तुम बहुत मीठा बोलते हो, हर शब्द को, चाशनी मे घोलते हो, मिशरी की तरह, रस घोलते हो, न कड़वा बोलते हो, … more →
jayantijain wrote 2 months ago: मनोवैज्ञानिकों ने मन को दो बड़े भागों में विभक्त किया है। 1. चेतन मन – मस्तिष्क का वह भाग, … more →
Nidhi KM wrote 3 months ago: मैने कयी बार, कभी अपनों के, कभी तुम्हारे कहने पर, नयी सुबह का इंतज़ार किया, नयी माला मे फूल गुथे, नय … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: चलते थे जिस ज़मीं पर, संभल संभल कर हम, सरकी वही ज़मी नये कदम उठाने के पहले, आसमान से तो पानी बरसता … more →
Nidhi KM wrote 4 months ago: चाहे जले हमारा जहाँ, रौशन रहे उनका जहाँ, जहाँ रहे चाहत हमारी… न आए उन पर, कोई भी आँच, जहां की … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: जिसको जो कहना हो, उसको वो कहने देना, मेरी प्रीत को, प्रीत “निधि” की रहने देना, तुम कोई न … more →
jayantijain wrote 5 months ago: हमारा सबसे बड़ा सहायक कौन है? अस्तित्व कहो या परमात्मा से बढ़कर हमारा कोई सहायक धरती पर नहीं है। इस ई … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: मैं नदी थी प्यासी सी तुम सागर से मिलने चली थी मिलकर सागर मे ये जाना मैं ही अकेली, प्यासी नही थी सागर … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: बारीशों मे भीगे जो, बादल से बरसे जो, कारण से धड़के जो, यादों मे रोए जो, वो मेरा दिल नही होगा… … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: तपती धूप मे , दुख के तूफ़ानों मे ग़म की परछाईयों मे , अंधेरी रातों मे भटकी हुई राहों मे , अनजानी मन् … more →
Nidhi KM wrote 5 months ago: तेरी ज़िंदगीं में कभी, धूप की तपन न हो, हो ज़रा भी आशंका, मेरा आंचल, तेरे सर पर हो, तेरी राहों मे क … more →