तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच निकलते है | अंधेरों का ख़ौफ़ नही रहा … more →
mehekदीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रीति कर सुख लेने को सुख गया हिराय जैसे पाइ छछुंदरी, पकडि सींप पछिताय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
अफ़लातून wrote 5 months ago: [ अब की गरमियों में पहला पड़ाव हैदराबाद था । जहाँ एक जानदार व्यक्ति - लाल्टू से मुलाकात हुई । उनकी कव … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से … more →
pryas wrote 1 year ago: कृष्ण गोकुल से मथुरा आ गए। उनको मथुरा में कुछ भी अच्छा नहीं लगता। वहां मथुरा में उद्धव भगवान कृष्ण क … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आपल्या प्रेमाचे ना हे आसेच असते कधी कोणी रूसते,कधी कोणी हसते दुरून प्रेम किती सुरेख दिसते हवे हवे वा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: वक़्त ही बाकी रह गया है अक्सर सुनती आई हूँ,वक़्त की कमी है | मेरी आँखों में बस, तेरी यादों की नमी है … more →
mehhekk wrote 1 year ago: दीदार खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात सज सवर कर बैठी है नही करती किसीसे बात कुछ भी कहो ,गुलाब … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तू येशील ना अजूनही मी तुझी वाट पहाते,तू येशील ना त्या रम्य स्वप्नात पुन्हा मला नेशील ना… … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आठवनिंच्या झोक्यावर आज घेतला मी विसावा अजूनही शोधाते आहे प्रेमाचा तों हरवलेला ओलावा आज मज पाशी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: रेशम सी किरने,एक नया सवेरा फूलों में बदली सारी कलिया कही दव की बूँदे ,थोड़ी पत्तियों की शरारत सारी … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कनक सी रवि किरनो से पवन मखमली एहसास तले मनमोहक झरना निर्मल सा हरे पन्नो के बीच में दो कमल के फूल खि … more →