नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझे मैंने दिल लगाया है’ तुम से ही आज न पिघला तो कल पिघलेगा यह बात हम सुनेंगे’ तुम से ही आज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रgulabkothari wrote 1 month ago: अहंकार शब्द कान … more →
विनय wrote 2 months ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझ … more →
विनय wrote 4 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →
विनय wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →