नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझे मैंने दिल लगाया है’ तुम से ही आज न पिघला तो कल पिघलेगा यह बात हम सुनेंगे’ तुम से ही आज… more →
तख़लीक़-ए-नज़रwrote 7 months ago: अहंकार शब्द कान … more →
wrote 8 months ago: नहीं आसाँ तो मुश्किल ही सही मुझको मोहब्बत है’ तुम से ही नाज़ है तुम्हें’ थोड़ा ग़ुरूर मुझ … more →
wrote 10 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →
wrote 1 year ago: वफ़ाइयाँ मेरी तुझसे ये वफ़ाइयाँ बेवफ़ाइयाँ मेरी ख़ुद से बेवफ़ाइयाँ अजब कशमकश है तेरे प्यार में जाने क्या … more →
wrote 2 years ago: हम जितना करते हैं’ ग़लत करते हैं गर सही भी करते हैं तो ग़लत करते हैं तुमको बतायेगा कौन ख़ुदा भी … more →
wrote 2 years ago: मैं खा़क़सार था उसने मुझको माटी समझा मुझे उम्मीद रही वो मुझको सोने की तरह छूकर देखेगा… उसने कुछ … more →