मैं तो इस अंतर्जाल को एक तरह का इंद्रजाल भी मानने लगा हूँ। अपनी पोस्टों का पीछा मैं कभी नहीं करता और एक बार लिखने के बाद मैं यह जानने का प्रयास नहीं करता कि वह लोगों को अच्छी लगीं या नहीं। पहले भी… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं तो इस अंतर्जाल को एक तरह का इंद्रजाल भी मानने लगा हूँ। अपनी पोस्टों का पीछा मैं कभी नहीं करता … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज पहली बार बहुत समय बाद लोगों के मुहँ से क्रिकेट के बारे में चर्चा करते सुना, और स्पष्ट है कि यह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्द के भूतपूर्व अध्यक्ष श्री आई। एस। बिंद्रा ने कपिल देव पर आई। सी। एल। को … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जंगल के राजा शेर को उसके खुफिया प्रमुख सियार भाया ने दी खबर ‘महाराज आपके खिलाफ पूरे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने ——– अब रात के अंधेरो से ज्यादा दिन की रौशनी में अपनों की अँधेरी नीयत से लोग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन्त्री जी ने मीटिंग में अपने सचिव से कहा’- इस बार के वार्षिक पुरस्कार के लिये ऐसे लेखक का … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: शहर में गंदगी के ढेर देखकर अंग्रेज पर्यटक ने स्थानीय गाइड से पूछा -’ हमने सुना है जब हमार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: धन, पद और प्रतिष्ठा की शक्ति हो जाती है जिन पर मेहरबान क्यों न करे वह उस पर अभिमान इस जहां में सभी य … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वाह रे बाज़ार तेरा खेल मैदान में पिटे हीरो को कागज और फिल्म पर चमकाकर और सजाकर जनता के बीच देता है ठ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आँखें देखतीं हैं कान सुनते हैं और जीभ का काम है बोलना पर जो पहचान करे सुनकर जो गुने और जो श्रीमुख से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बच गया हेरी पॉटर लोग जश्न मनाते हुए किताब खरीदने के लिए दुकानों पर लाईन में खडे हैं अपनी हकीकतों से … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दूरदराज कहीं होता है विश्व हिन्दी सम्मेलन कहीं पास ही होता है हिन्दी कन्वेंशन चहूं ओर फैली रोशनी र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है तथा किसी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है- गलत टाईम सेट … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है तथा किसी व्यक्ति या घटना से कोई संबंध नहीं है ) साधुवाद का युग बीत गय … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: (यह रचना कल नारद पर प्रकाशित नहीं थी इसलिये यहाँ पुन: प्रकाशित की गयी है) वह प्रतिदिन हिट होने के न … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सुबह का भूला शाम को घर वापस आ जाता है पर रात को जो भटका वह सुबह तक वापस नहीं आये तो घर में तूफ़ान म … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार भारत की तेजी से मजबूत होती अर्थव्यवस्था और आईटी … more →