wrote 1 year ago: फैज़ को पढ़ रहा था, ‘निसार मैं तिरी गलियों के ऐ वतन, कि जहां/ चली है रस्म कि कोई न सर उठाके चल … more →
wrote 2 years ago: … more →
wrote 2 years ago: सुनो नेता जी तुम क्यों एक नंगे बच्चे जैसा व्यवहार करते हो जो अपनी आँखें बंद कर लेता है और सोचता है क … more →