विनय wrote 1 year ago: निख्खा शक्कर है उससे मरासिम में ज़्यादा को इक रोज़ ज़हर होना था अब तू ही बता, मैं तुझसे जुदा किधर जाऊँ … more →
विनय wrote 1 year ago: आज हो या कल हो हम आपको ही चाहेंगे कहता है जो कुछ मन उसको ही मानेंगे आज हो या कल हो हम आपको ही चाहेंग … more →
विनय wrote 1 year ago: इस पल से उस पल तक तुमको ही चाहेंगे कहता है जो कुछ दिल उसको ही मानेंगे इस पल से उस पल तक तुमको ही चाह … more →
विनय wrote 2 years ago: नामालूम वह दिन मैंने जन्नत में गुज़ारे या जहन्नुम में मगर बीते हुए दिन मुझे आज भी ढ़ूँढते हैं वह ताने … more →