इन फूलों की बारिश में भीग लेते है हम भी मोहोब्बत के इत्र की महक जरा बदन पर चढा लूँ अगले मौसम तक फिर ये ताजगी रहेगी मन में . ——————————… more →
mehekalishaminta wrote 3 weeks ago: Door hai apse to kuch gam nahi, Door rehke bhulne wale hum nahi, Roz mulaqat na ho to kya hua, apki … more →
mehhekk wrote 2 months ago: इन फूलों की बारिश में भीग लेते है हम भी मोहोब्बत के इत्र की महक जरा बदन पर चढा लूँ अगले मौसम तक फिर … more →
mehhekk wrote 2 months ago: बहुत कुछ कहना चाहता है दिल ..ये अचानक चलते चलते सफ़र में …हम दोनों में दूरियाँ कहा से आ गयी . … more →
mehhekk wrote 3 months ago: ये इश्क भी क्या क्या खता करवाता है महबूब -ओ-दिल पे शक की सुइयां दिखाए माना उनसा इमानदार न कोई कायना … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अपने साथ भतीजे को भी फंदेबाज घर लाया और बोला ‘दीपक बापू, इसकी सगाई हुई है मंगेतर से रोज होती मोबाइल … more →
mehhekk wrote 1 year ago: शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: बूँद में छिपा अस्तित्व ढुंढ़ो तो मिल जाए बूँद से मिलती आशा सब की प्रेरणा बन पाए | बूँद विश्वास की … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नींद की लहरों में ख्वाबों के समंदर से उठ कर रौशनी की चाह जगाता हुआ चमचमाती चाँदनी शुभ्रा सा घुलता ह … more →
mehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ स … more →
mehhekk wrote 1 year ago: न जाने क्यों वो ये कैसे सोच लेता है के उसके हर जज़्बात हमारा दिल समझता है साथ होकर भी तरन्नुम-ए-खामो … more →
mehhekk wrote 1 year ago: राह देखे मन प्रतिपल हर क्षण ढूँढे तुझे मेरा बिखरा कन कन नही सुने जाते जमाने के ताने उस पर न आने के त … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कायनात झुक जाएगी हबीब-ए-सुलताना तेरा अक्स देखा था पानी में ऐसा हुस्न-ए-माहताब पहेले न देखा ज़िंदगा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ऐसी हर सहर कीजिए नींद खुले देखूं तुम्हे ऐसी हर सहर कीजिए दिल में छुपाए कुछ राज़ हमे खबर कीजिए | प … more →
mehhekk wrote 1 year ago: त्रिवेणी 1.लफ़्ज़ों का सज़ा कर नगमा हाल-ए-दिल सुनाया उनके लबों की मुस्कान देख समझे हमने उन्हे मनाया … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कौन हो नूरे-जिगर कोई मोह्पाश हो दहकते दिल में खिला प्यार पलाश हो | खीची चली आती हूँ उसी मकाम पर म … more →
mehhekk wrote 1 year ago: खामोशियाँ भी तेरी दिल को है गवारा अज़ीज-ए-जानशीन के किस्सा-ओ- मोहोब्बत तेरी आँखों से बयान हो जाता द … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आयो होली को त्योहार बिखरी फागुन की बहार मनवा झूमे हमार चढ़ता मस्ती का खुमार ढोल मंजीरे ढ़म ढ़ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: होली //1// मन में घुली मीठी गुझिया सी बोली हो प्यार के रंग लगाओ दुश्मन या सहेली हो | गुबा … more →