“मंजिलें भी उसकी थीं, रास्ते भी उसके थे , मैं तनहा था , काफिले भी उसके थे , साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ते बदलने का फ़ैसला भी उसका था, आज क्यूँ तनहा है ये … more →
Gaurav's Notesविनय wrote 1 year ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह दर्द बड़ा बेदर्द है सीने में लुत्फ़ जीने क सब ख़त्म हो गया … more →
विनय wrote 2 years ago: जी मेरा सीने में कुछ सिमटता है एक नया सवाल-सा उठता है हमें ख़ुद रंज आप-से आता है क्यों सुकूँ दम-ब-दम … more →
Gaurav Mishra wrote 2 years ago: “मंजिलें भी उसकी थीं, रास्ते भी उसके थे , मैं तनहा था , काफिले भी उसके थे , साथ साथ … more →