शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सरका आँख का काजल | ठंडी हवाओं का नज़दीक से गुज़रना नस नस में दौड़ती सहर आँधियों का हमे अपने आगोश में ल… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: शाम सुहानी सी धूप की चादर को हटाकर बिखर गये नीले स्याह से बादल गरजत बरसात बूँदों का आना ,गालों पर सर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: मोहोब्बतें आँखों से आँखों का फलसफा कहती खामोशियों में भी मदहोश सी बहती मोहोब्बतें बन अफ़साना हमारे द … more →
mehhekk wrote 1 year ago: रब्बा दीदार करा दे रब्बा ये मुझे क्या हुआ है शायद इश्क़ का बुखार चढ़ा है | रब्बा मैं सूद बुद खो बैठी … more →