नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली गिराके राधा चली कहाँ ऐसे गगरी सँभाले इठलाती है बल खाती है जिया जलाती है राधा काहे साँवले से इतना इतरा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रgulabkothari wrote 5 months ago: राधा-कृष्ण, प्रक … more →
विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →