Blogs about: Rakesh

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आवाजों का इंतजार

स्वार्थ wrote 3 months ago: आवासीय समिति के सचिव महोदय आज घर में अकेले रह गये थे। बेहद जरुरी काम से उनकी पत्नी, बच्चों के साथ मा … more →

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मन के फरेब2 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: सच कुछ भी हो पर मन माने तब ना। वह तो विचार ढूँढे रखता है अपने आप को बहला कर रखने के लिये। अपने मुताब … more →

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प्रोफेशनलिज्म, संवेदना और इंसानियत7 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: वेशभूषा और पास पड़े बैग से वह कॉलेज की छात्रा प्रतीत होती थी। वह अपनी स्कूटी से गली से मुख्य सड़क पर प … more →

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मातृत्व की विरासत2 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: माँ, क्या कभी भी बड़ी हो पाती है अपने बच्चों की बढ़ती उम्र के साथ? क्यों उसके अन्दर आधुनिक जमाने की सम … more →

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मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना4 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: “मैं बाहर हूँ, कॉल करके आता हूँ तुम तब तक अपनी खरीदारी पूरी कर लो“। पत्नी से इतना कहकर न … more →

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गर्दभ स्वप्न8 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: बात बहुत पुरानी नहीं है। गधे इस बार मनुष्य के साथ आर पार की लड़ाई करने के मूड में आ गये और सारे गधों … more →

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जीवन बस यहीँ अभी2 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: मन ही मन दुखी तो वह पहले से ही रहता था पर जब से उसने सस्ते दामों पर मिल जाने वाली ज्योतिष की एक किता … more →

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“मैं” है तो प्रेम कहाँ

स्वार्थ wrote 3 years ago: अपने “मैं” को खोकर जिसे पाते वह सौगात प्रेम की ! …[राकेश] … more →

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प्रेम का फूलना2 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: कली से फूल प्रेम से और प्रेम खुद से आते ! …[राकेश] … more →

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पूर्ण समर्पण

स्वार्थ wrote 3 years ago: जो हुआ ठीक हुआ बीत गया सो बात गयी सुबह नयी है फिर से आया है सूरज आकाश में हवा भी तो इठलाती बल खाती च … more →

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प्रेम और समय6 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: जाने कैसे ऐसा होता है जाने क्यों ऐसे होता है बीते हुए की स्मृर्तियों के साथ साथ आकर जाने कब तुम खिलव … more →

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प्रेम और अंहकार2 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: समय रहते एक बार तो जवाब दे दो मेरी पुकार का| बाद में ऐसा ना हो समय उलझा ले अपनी व्यस्तता के जाल में … more →

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शर्म और प्रेम2 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: साँस उखड़ती जाती है पलकें झुकती जाती हैं गाल सुर्ख़ हुए जाते हैं ऊँगलियाँ खेलती जाती हैं बालों की घु … more →

टैग: कविता, राकेश, Love, शर्म, प्रेम

नेह भरा काजल4 comments

स्वार्थ wrote 3 years ago: बचपन, कभी लगता है कि बस अभी ही तो बीता था, और आज भी इतना पास है कि हाथ बढ़ाया और छू लिया, और कभी लगता … more →

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आज की हस्ती : ऋतिक रोशन

DR. KUMAR GANESHE 369 wrote 4 months ago: जय श्री राम …………| आदरणीय मित्रो, यह है 10 जनवरी की बात का दूसरा भाग| ऋतिक रो … more →

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आज की हस्ती : राकेश रोशन

DR. KUMAR GANESHE 369 wrote 8 months ago: जय श्री राम …………| आदरणीय मित्रो, यह है 06 सितम्बर की बात| राकेश रोशन (फ़िल्म … more →

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सकाफति ऐं बो॒ली मंझ मूंझयलि सिंधी कोम5 comments

Rakesh Lakhani wrote 1 year ago: सिंध में हिन साल नवम्बर 19-20 तारिख सकाफति दिं॒हिं मञाअण जी तारिख मुकर्र कई वई । सिंध में सकाफति दिं … more →

टैग: sindhi blog, Sindhi devnagri, सिंधी हिंदू, सिंधी आमिलि, सिधी बलाग, सिंधी सकाफत, अजरक, sindhi Cultural, Sindhi Amils

बोरियत2 comments

स्वार्थ wrote 1 year ago: सुनहरी चाय के प्याले से उठती अदरक और चाय की मिली-जुली सुगंधित भाप सुहानी प्रतीत हुयी पर कप उठा चुस्क … more →

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प्रेम से भय कैसा

स्वार्थ wrote 1 year ago: प्रेम में खोना पड़ता है बहुत सारी बातों को बल्कि खो देना पड़ता है खुद को ही इस भय से प्रेम में पूर्ण-स … more →

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