mehhekk wrote 1 year ago: गर्भ कोष की गहराई में एक बीज आकार ले रहा हौले हौले जोड़ रहा है सवेदना की पंखुड़ियों को खूबसूरत कली प … more →
mehhekk wrote 1 year ago: आयो होली को त्योहार बिखरी फागुन की बहार मनवा झूमे हमार चढ़ता मस्ती का खुमार ढोल मंजीरे ढ़म ढ़ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: होली //1// मन में घुली मीठी गुझिया सी बोली हो प्यार के रंग लगाओ दुश्मन या सहेली हो | गुबा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.. जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है | 2,, ये तन्हा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: फूलों से रंग और महकती मधु बूंदे हर सुबह नज़रों से बिन भूले पिये जा | फिर भंवरे के जैसी मीठी गुंजन कर … more →
mehhekk wrote 1 year ago: हम तुम अलग अलग दो तन एक मन बाहों में ये कंपन हमारी तुम्हारी बढ़ती धड़कन हम फूल तुम खुशबू … more →
mehhekk wrote 1 year ago: कुछ पल जिंदगी के होते है कितने अच्छे मुलायम और मासूम से कभी हम अंजाने ही मूड जाते उन राहों पर निहारन … more →