ख्वाब अँखियों की पलकों में समाए ये रहते मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु से रंगीन ये ख्वाब | नींद में कितने बन जाते ये अपने से खुल जाए जो चक्षु हो गये पराए वे कुछ पाकर कुछ ह… more →
mehhekk wrote 1 year ago: ख्वाब अँखियों की पलकों में समाए ये रहते मन में छिपी बातों को हमसे ये कहते कुछ स्याह कुछ इंद्रधनु स … more →
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