अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निछार होता कोई फ़ितना था क़यामत ना फिर आशकार होता तेरे दिल पे काश ज़ालिम मुझे इख़्तियार होता जो तुम्हारी तरह तुम से कोई झूठे वादे करता तुम्ह… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता कभी जान सदक़े होती कभी दिल निछार होता कोई फ़ितना था क़यामत ना फिर … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: शहरों शहरों आज हैं तन्हा दिल पर गहरा दाग़ लिये, गलियों गलियों हो गये रुसवा दिल पर गहरा दाग़ लिये, आज ग … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ये किसका तसव्वुर है ये किसका फ़साना है, जो अश्क है आँखों में तस्बीह का दाना है, आँखों में नमी सी है च … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: वो जो हम में तुम में क़रार था तुम्हे याद हो के न याद हो, वही यानी वादा निबाह का तुम्हें याद हो के न य … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: फिर कुछ इस दिल को बेक़रारी है, सीना ज़ोया-ए-ज़ख़्म-ए-कारी है, फिर जिगर खोदने लगा नाख़ून, आमद-ए-फ़स्ल-ए-लाल … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: पत्ता पत्ता बूटा बूटा हाल हमारा जाने है, जाने ना जाने गुल ही ना जाने बाग़ तो सारा जाने है, चारागरी बी … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ओस पड़े बहार पर आग लगे कनार में, तुम जो नहीं कनार में लुत्फ़ ही क्या बहार में, उस पे करे ख़ुदा रहम गर्द … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मुझे दे रहे हैं तसल्लियां वो हर एक ताज़ा पयाम से, कभी आके मंज़र-ए-आम पर कभी हट के मंज़र-ए-आम से, ना ग़रज़ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: कब से हूँ क्या बताऊं जहान-ए-ख़राब में, शब हाय हिज्र को भी रखूं गर हिसाब में, ता फिर ना इंतज़ार में नीं … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: मेहरबां हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त, मै गया वक़्त नहीं हूं के फिर आ भी ना सकूं, ज़ौफ़ में ता नये अ … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: उस की हसरत है जिसे दिल से मिटा भी ना सकूं, ढ़ूंढ़ने उस को चला हूँ जिसे पा भी ना सकूं, ड़ाल कर ख़ाक मेरे … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: जब भी आती है तेरी याद कभी शाम के बाद, और बढ़ जाती है अफ़्सुर्दादिली शाम के बाद, अब इरादों पे भरोसा है … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: इश्क़ फ़ना का नाम है इश्क़ में ज़िंदगी न देख, जल्वा-ए-आफ़ताब बन ज़र्रे में रोशनी न देख, शौक़ को रहनुमा बन ज … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: दिल को क्या हो गया ख़ुदा जाने, क्यों है ऐसा उदास क्या जाने, कह दिया मैने हाल-ए-दिल अपना, इस को तुम जा … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना, आदमी को भी मयस्सर नहीं इन्सां होना, की मेरे क़त्ल के बाद उस ने … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: धुंआ उठा था दीवाने के जलते घर से सारी रात, लेकिन वो ख़ामोश रहे दुनिया के ड़र से सारी रात, रात यूँ जलते … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: अपना ग़म भूल गये तेरी जफ़ा भूल गये, हम तो हर बात मोहब्बत के सिवा भूल गये, हम अकेले ही नहीं प्यार के दी … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: अजब अपना हाल होता जो विसाल-ए-यार होता, कभी जान सदक़े होती कभी दिल निसार होता, ना मज़ा है दुश्मनी में न … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: आँख को जाम समझ बैठा था अंजाने में, साक़िया होश कहाँ था तेरे दीवाने में, जाने किस बात की उनको है शिकाय … more →