रातें थी सूनी सूनी, दिन भी उदास थे मेरे, तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे, खामोश इन लबो को एक रागिनी मिली है, मुरझाये से गुलो को एक ताजगी मिली है, घेरे हुए थे मुझ को कब से घने अंधेरे, रूठा हुआ था मुझ… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: रातें थी सूनी सूनी, दिन भी उदास थे मेरे, तुम मिल गए तो जागे सोये हुए सवेरे, खामोश इन लबो को एक रागिन … more →