बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से होते हैं, अश्क जो आँखों में उतर आयें फिर पलकें भिगोते हैं… शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 2 years ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से … more →