मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने मुझको सदा ख़ुशबू के इक बादल के पार देखा और मैं चाह कर भी कभी उसको इस तरह न देखूँगा मैं सबसे बुरा था … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ोर से दिल धड़कता है (हाँ धड़कता है) तूफ़ान साँसों में चलता है (हाँ चलता है) आँखें ठहर जाती हैं तस्वी … more →
विनय wrote 1 year ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे … more →
विनय wrote 1 year ago: दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे हम अपने दिल की बात गुज़र गये वह सारे लम्हे बिताये थे जो हमने साथ पास तो … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई आया है जाने के बाद क़ब्र पर वह गया है दो गुल मुझे नज़्र कर कोई तूफ़ाँ उठा था जो मिट गया है दे गया ह … more →
विनय wrote 1 year ago: Look at me, see my face How much it has disgrace I wish I could undo What i did with you in past Lov … more →