हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर कितना लिखते हैं यह अलग बात है पर जो हिंदी में लिखने वाले मौलिक तथा स्वतंत्र लेखक हैं उनसे यह अपीलें ज… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: यह एक टिप्पणी जो उस ब्लाग पर नहीं रखी जा सकी जिसमें श्रीगीता के युद्ध की चर्चा करते हुए उस ब्लाग लेख … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कबीर सपनें रैन के, ऊपरी आये नैन जीव परा बहू लूट में, जागूं लेन न देन संत शिरोमणि कबीरदास जी का आशय य … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रीति कर सुख लेने को सुख गया हिराय जैसे पाइ छछुंदरी, पकडि सींप पछिताय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: समलैंगिक मामले पर न्यायालय का निर्णय शिरोधार्य! लोगों के अपने दैहिक संबंधों पर स्वयं ही निर्णय करने … more →
Ajay Saklani wrote 5 months ago: यह बात अक्सर सुनने में आती है कि हमारे देश में अमीर और भी अमीर होता जा रहा है और गरीब और भी गरीब| ले … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई होने … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: संत कबीर महाराज कहते हैं कि ———————– कबीर तो सांचै म … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसौ जाय कविवर रहीम कहते हैं कि गंदे स … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म विष … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: सिहों के लेहैंड नहीं, हंसों की नहीं पांत लालों की नहीं बोरियां, साथ चलै न जमात संत शिरोमणि कबीर दास … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————– कृमिकुलचितं लालाक्लिन् … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कविवर रहीम कहते हैं कि ——————- वहै प्रीति नहिं रीति वह, नहीं पाछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिय से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: संत कबीरदास जी का कहना है ——————— गाहक मिलै तो कुछ कहूं, न … more →