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Blogs about: Relegion

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अखबार ने पाठ छापा पर नाम नहीं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: हिंदी की सेवा करने का दावा करने वाले बहुत हैं। इनके नाम भी आपने देखे होंगे। यह लोग हिंदी के नाम पर क … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, मस्तराम, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Blogroll, Deepak bapu

श्री गीता अतुलनीय पुस्तक-हिन्दी आलेख Shri Geeta incredible book - Hindi article

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: यह एक टिप्पणी जो उस ब्लाग पर नहीं रखी जा सकी जिसमें श्रीगीता के युद्ध की चर्चा करते हुए उस ब्लाग लेख … more →

Tags: Hindi Education, Hindi writing, Hindu darshan, Hindu culture, hindu dharm, hindi vichar, hindi megzine, bhagavan shri krishn, bhagvan shri ram

संत कबीर के-रात के सपने निराशा का भाव पैदा करते हैं (sant kabir-rat ke sapne aur nirasha)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: कबीर सपनें रैन के, ऊपरी आये नैन जीव परा बहू लूट में, जागूं लेन न देन संत शिरोमणि कबीरदास जी का आशय य … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, दोहे, मस्त राम

रहीम क दोहे- दिल लगाकर कम करें कामयाबी तय करें (rahim ke dohe)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: रहिमन मनहि लगाईं कै, देखि लेहू किन कोय नर को बस करिबो कहा, नारायन बस होय कविवर रहीम के मतानुसार मन ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दोहे, धर्म, मस्त राम, सन्देश, साहित्य, हिन्दी

संत कबीर क दोहे-विषधर बहुत हैं, मणिधारी कम (sant kabir ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: प्रीति कर सुख लेने को सुख गया हिराय जैसे पाइ छछुंदरी, पकडि सींप पछिताय संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, कला, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, Hindi Darshan

रहीम के दोहे-अमीर को पैसा देने के लिए सब तैयार,गरीब से इंकार (rahim ke dohe)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, jagran, alekh, adhyatm, Anubhuti, India, धर्म, शब्द

मनुष्य के अलावा कोई दूसरा प्राणी समलैंगिक नहीं होता-संपादकीय (ariticle on homsexuality)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: समलैंगिक मामले पर न्यायालय का निर्णय शिरोधार्य! लोगों के अपने दैहिक संबंधों पर स्वयं ही निर्णय करने … more →

Tags: Blogroll, Hindi online journalism, Hindu darshan, Hindu culture, web duniya, Hindi vews, hindi abhivyakti, hindi megzine, hindi thinking

आस्था में अंधा होता हमारा समाज17 comments

Ajay Saklani wrote 5 months ago: यह बात अक्सर सुनने में आती है कि हमारे देश में अमीर और भी अमीर होता जा रहा है और गरीब और भी गरीब| ले … more →

Tags: Society

संत कबीर वाणी-मूर्ख लोग सभी की पीड़ा एक समान नहीं मानते

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →

Tags: alekh, आलेख, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, bharat, Deepak bharatdeep, dharm

रहीम दास के दोहे-बुराई का नतीजा सामने जरूर आता है

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन खोटी आदि की, सो परिनाम लखाय जैसे दीपक तम भखै, कज्जल वमन कराय कविवर रहीम कहते हैं कि बुराई होने … more →

Tags: हिन्दी, jagran, Internet, India, सन्देश, रहीम, अनुभूति, Deepak bharatdeep, web dunia

संत कबीर वाणी:मिल बाँट कर खाएं वही हैं वीर

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: संत कबीर महाराज कहते हैं कि ———————– कबीर तो सांचै म … more →

Tags: आलेख, चिंतन, अभिव्यक्ति, jagran, Internet, Kabir, dharm, hindu, India

रहीम दास के दोहे-जो करे काम, वही पाता है सम्मान

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाय उदधि बड़ाई कौन है, जगत पिआसौ जाय कविवर रहीम कहते हैं कि गंदे स … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, hindi abhivyakti, hindi adhyatm, Hindi Blogging

संत कबीर वाणीः अच्छा खाने को मिले तो भी बेवकूफ की संगत न करें

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कबीर संगत साधु की, जौ की भूसी खाय खीर खीड भोजन मिलै, साकट संग न जाय संत कबीर दास जी कहते हैं कि साधु … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अभिव्यक्ति, jagran, dohe, India, सन्देश, हिन्दू, अनुभूति

मनुस्मृति-अपशब्द का उत्तर अपशब्द से न दें

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अध्यात्मरतिरासीनो निरपेक्षो निरामिषः आत्मनैव सहायेन सुखार्थी विचरेदिह हिंदी में भावार्थ-अध्यात्म विष … more →

Tags: inglish, हिन्दी, Dashboard, आध्यात्म, धर्म, अभिव्यक्ति, Internet, online jurnalism, Culture

संत कबीरदास के दोहे-भगवान के साथ चतुराई मत करो1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: सिहों के लेहैंड नहीं, हंसों की नहीं पांत लालों की नहीं बोरियां, साथ चलै न जमात संत शिरोमणि कबीर दास … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

भर्तृहरि नीति शतक: कुत्ता हड्डी चबाते हुए इन्द्र देवता की परवाह नहीं करता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ——————– कृमिकुलचितं लालाक्लिन् … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, jagran, alekh, abhivyakti, adhyatm, Internet, Anubhuti

रहीम दास के दोहे:स्वार्थ के कारण हुआ प्रेम घटता जाता है 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कविवर रहीम कहते हैं कि ——————- वहै प्रीति नहिं रीति वह, नहीं पाछ … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, धर्म, India, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya, web bhaskar, web jagran

संत कबीर दास वाणीः हृदय की बात स्वत: जाने वही है सच्चा प्रेम

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिय से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

Tags: Hindi Education, Hindi online journalism, Hindi knowledge, Hindi writing, Hindi Darshan, Hindu darshan, Hindu culture, bharat, hindi bharat

कबीर दास के दोहे: अंधों के आगे रोना, अपनी आँखें बेकार में खोना

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: संत कबीरदास जी का कहना है ——————— गाहक मिलै तो कुछ कहूं, न … more →

Tags: inglish, हिन्दी, Internet, Education, online jurnalism, bharat, Religion, web duniya, hindi bharat


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