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साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है
साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है मोहब्बत मुझे मसल रही है ख़्यालों की राह-राह जल र… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: साँस रफ़्ता-रफ़्ता पिघल रही है मोहब्बत म … more »
राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: राहे-इश्क़ में मुश्किल ही सही पार उतरना … more »
आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आहिस्ता-आहिस्ता नज़दीकियाँ बढ़ने लगीं … more »
ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ गया
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़िन्दगी ढूँढ़ते-ढूँढ़ते मैं तुम तक आ ग … more »
यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: यह बता मुझको! तुझको मुझसे क्या गिला मु … more »
कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कोई तो तुम्हें पाने की राह मिले कभी ते … more »
आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा च … more »
किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: किसी राह तुमसे मुलाक़ात होगी फिर हल्की- … more »
दिल तोड़ना at first sight
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दिल तोड़ना at first sight झूठा गुस्सा उस पर झूठ … more »
उफ़! यह मोहब्बत
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: “उफ़! यह मोहब्बत भी क्या चीज़ है कभी बोझ … more »
तेरी जगह कौन ले सकता है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तेरी जगह कौन ले सकता है मेरे जीवन में त … more »
उड़ते हुए दिन, दबी हुई रातें
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: उड़ते हुए दिन, दबी हुई रातें सीने में ब … more »
अब तेरा ही सपना है
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: रात-दिन दुआओं में तुमको माँगता हूँ तुम … more »
इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: इल्तिहाबे-दर्द से जलता है कलेजा कभी ते … more »
Nothing extraordinary
Pritam P Hans wrote 7 months ago: Today when I was on the bus to ITO (Bahadur Shah Zafar Marg, the Fleet Street of India), it was a us … more »
तेरे चेहरे पर अपनी नज़र ढूँढ़ते हैं
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: हर गली हर कूचा दर-ब-दर ढूँढ़ते हैं हम अप … more »
हम तन्हा और यह सफ़र तन्हा
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विनय प्रजापति wrote 7 months ago: हम तन्हा और यह सफ़र तन्हा तुझे ढूँढ़ने … more »
पिछला कुछ भी बदला नहीं जा सकता
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: बीते दिनों की गलियों में जब पाँव पड़ते … more »
एक अधूरी ख़ाहिश लिए
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: एक अधूरी ख़ाहिश लिए मैं भटक रहा हूँ दर- … more »
