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Blogs about: Rohit

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वो बहुत याद आए भुलाने के बाद8 comments

Rohit Jain wrote 1 month ago: वो बहुत याद आए भुलाने के बाद आग बुझती नहीं है ज़माने के बाद और इस से बड़ी कोई मुश्किल नहीं ज़िंदगी ब … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Sep, 2009, 2009, आए, कविता, के, गज़ल, जैन

बदले बदले3 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: जारी हैं क़त्ल अब भी बस सर हैं बदले बदले हैं आज भी वो क़ातिल खंजर हैं बदले बदले इल्ज़ाम हैं लगाते के … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, कविता, jain, 2007, Oct.

किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं 4 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: किसने बोला क़ज़ा से ड़रते हैं हम तो तेरी वफ़ा से ड़रते हैं दुश्मनों का तो हम को ड़र ही नहीं दोस्तों … more →

Tags: 2009 A Poetic Journey, Aug, 2009, मेरी गज़लें, रोहित, जैन, कविता, jain, से, हैं

यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर2 comments

Rohit Jain wrote 3 months ago: यूँ इश्क़ का हमने दिया है इम्तिहां अक़्सर मुँह में ज़ुबां होते हुए थे बेज़ुबां अक़्सर इश्क़ की तासीर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007, रोहित, जैन, कविता, jain, का, है

तुम्हारी राहें...5 comments

Rohit Shrivastava wrote 8 months ago: मैंने रोशनी बाँटी है अंधेरों को, तुम्हारी राहें जगमगाने के लिये! मैं खिला बैठा हूँ राह के हर पत्थर प … more →

Tags: ह्रदय-वाणी

मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है2 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: मेरे वजूद को यूँ तेरे काम आना है जिगर का लख़्त लख़्त होंठ पर सजाना है न जाने क्या कहा है शम्अ ने परवान … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, DEC 2008, jain, 2008, को, है, मेरे, यूँ

कोई सूरज हमारी ताक में है5 comments

Rohit Jain wrote 9 months ago: पसेज़ुल्मत कोई सूरज हमारी ताक में है इसी उम्मीद का दम अब हमारी ख़ाक में है नहीं है ख़ौफ़ किसी ज़ुल्म का ह … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, jain, 2008, है

तो स्वीकार मुझको नमन है तुम्हारा!!1 comment

Rohit Shrivastava wrote 9 months ago: चारों तरफ़ घोर विपदा प्रलय हो, भले ज्वार – भाटे सा निष्ठुर समय हो! हे भागीरथी! तुच्छ सागर में ल … more →

Tags: ह्रदय-वाणी

एक एहसान...1 comment

Rohit Shrivastava wrote 9 months ago: बस इतना सा एक आपका एहसान है लेना, इस सफ़र में ऐ हमसफ़र तू छोड़ ना देना! यूँ तो मुसाफ़िरों की भीड़ आती-जात … more →

Tags: ह्रदय-वाणी

कल मैंने एक सर्कस देखा...10 comments

Rohit Shrivastava wrote 10 months ago: नहीं समझ आया है आज भी, कोमल था या कर्कश देखा! कल मैंने एक सर्कस देखा !! जिस आयु में हमें दुलारा मात- … more →

Tags: ह्रदय-वाणी

एक मुक्तक

Rohit Shrivastava wrote 10 months ago: प्रेम के हर भाव को सराहता हूँ मैं, प्रेम के अभाव में कराहता हूँ मैं! एक याद भर से उसकी, छलक जाते हैं … more →

Tags: ह्रदय-वाणी

पूज्य पिताजी के जन्मदिवस पर...

Rohit Shrivastava wrote 10 months ago: इस पावन अवसर पर मैं कुछ मांग रहा हूँ आपसे, अपनी अनुकम्पा वृष्टि कर शुभ आषीश सदा देना! हो जाऊँ जब मैं … more →

Tags: ह्रदय-वाणी

आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल7 comments

Rohit Jain wrote 10 months ago: मै बनूं शाहजहां तू मेरी मुमताज़ महल आ तेरे प्यार में तामीर करूँ ताजमहल तू ही उर्दू का अदब और तू ही श … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, DEC 2008, में, रोहित, जैन, कविता, jain, 2008

मोहब्बत में1 comment

Rohit Jain wrote 12 months ago: कुछ ऐसे इश्क़ का धोखा मिँया खाया मोहब्बत में पराया जुर्म अपने नाम लिखवाया मोहब्बत में ये मेरा पैर मेर … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, में, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, jain

दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर5 comments

Rohit Jain wrote 12 months ago: हार जाने की कामरानी पर                दास्तां लिख रहा हूँ पानी पर आपने दिल मेरा जो तोड़ा है शुक्र करत … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Nov 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, jain, 2008

शायद4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: हमारी इब्तेदा ही है हमारी इंतेहा शायद मुसीबत में भी अब आने लगा हमको मज़ा शायद मोहब्बत बन गई है जान-ओ- … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, jain, 2008

सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो2 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: सोज़ेदिल में कभी कमी ना हो ज़िंदगी चाहे ज़िंदगी ना हो वो मुझे देखते हैं कुछ ऐसे उनकी आँखों में गो नमी न … more →

Tags: 2008 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, Nov 2008, 2008, कभी, कमी, कविता, गज़ल, जैन

मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ7 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: मै दिल की दीवारों से निकल आया हूँ मै ग़म के नज़ारों से निकल आया हूँ मुजरिमों कि क़तारों से निकल आया हूँ … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Oct 2008, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, jain

सिलसिला गुनाह का1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Sep 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, jain, 2008


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