तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ से सातो समंदर भी पार कर जाएँगे महफूज़ रखेंगे तेरे साए हमे ये सोच निकलते है | अंधेरों का ख़ौफ़ नही र… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: तुम्हे देख ए हमनशी कदम खुद ब खुद चलते है बड़ी मुश्किल से जज़्बा-ओ-दिल हमसे संभलते है | मिलने तुझ स … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नन्हे से दीपक में सजाई बाती रौशनी चारों तरफ,निखरी हुई ज्योति हर पल तप तप कर तुम हो जाना प्रखर दीप … more →