है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास का कुछ भी दिखाई नही दे रहा झुंझलाहट,क़ै… more →
mehekmehhekk wrote 4 months ago: है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास क … more →
mehhekk wrote 8 months ago: धूप का रेशमी टुकड़ा दिन की पहली प्र … more →
mehhekk wrote 9 months ago: काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक् … more →
mehhekk wrote 9 months ago: नयी सुबह जिसका कल से था इंतज़ार वह नयी … more →