है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास का कुछ भी दिखाई नही दे रहा झुंझलाहट,क़ैद का आभास अंधेरों में गुम होती आवाज़े कोई रोशनदान भी नही अगर तुम महसूस करोगे सब की हालत तेरे जैसी है कोई मद्दत के लिए नही … more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: है ना बहुत गहरा अंधेरा है, तेरे आसपास का कुछ भी दिखाई नही दे रहा झुंझलाहट,क़ैद का आभास अंधेरों में … more →
mehhekk wrote 1 year ago: धूप का रेशमी टुकड़ा दिन की पहली प्रहर में कोई दस्तक सुनाई दी झरोखे से देखा छुपकर वो खड़ा था मे … more →
mehhekk wrote 1 year ago: काटो से भरी राहे चुनकर जो चलते है अक्सर फूलों के बिस्तर उन्हे रास नही आया करते | इश्क़ की मुश्किल … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नयी सुबह जिसका कल से था इंतज़ार वह नयी सुबह अब आई है नये साल के साथ है आई नया आगाज़ संग लाई है | नयी … more →