यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नहीं माहे-क़ामिल3 है जिसने मुझको कहा सबसे अच्छा वह कोई पारसा4 है या बातिल5 है? तुम जाने किस बात पर रूठे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 4 months ago: यह सोज़गाह1 है कि मेरा दिल है मुझको जलाने वाला मेरा क़ातिल है जिसे देखकर उसे रश्क़2 आता है वह कोई और नह … more →
विनय wrote 9 months ago: उस्लूब*, उस्लूब, उस्लूब क्या पढ़ने वाले इनको समझते हैं वज़नी हो सीने पर गर ज़ख़्म उसे पढ़ने वाले दर्द … more →
विनय wrote 1 year ago: तुम जो देखते हो मैं भी जानता हूँ यह सब हुनर मैं भी जानता हूँ यह ख़ाब कच्चे तागे-सा है मगर सुबह टूट ज … more →