हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी जिसको लोहा कहा गया था मगर जब उतरे बर्ग़े-बहार दोस्ताना मोर्चा खा गया था बर्ग़े-बहार= बहार के पत्ते, मोर्चा= जंग, rust शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००२ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी जिसको लोहा कहा गया था मगर जब उतरे बर्ग़े-बहार दोस्ताना मोर्चा खा गया था बर … more →