चमन उजड़ा हुआ था मुज्महिल थी हर कली जिस दम सरापा दर्द थी वक्फे अलम थी जिंदगी जिस दम हुकूमत देश पर कायम थी मगरिब के दलालों की कोई वक़अत न थी दुनिया में हिंदुस्तान वालों की … more →
साहिर हाशमी की शाएरीsarhashmi wrote 2 years ago: चमन उजड़ा हुआ था मुज्महिल थी हर कली जिस दम सरापा दर्द थी वक्फे अलम थी जिंदगी जिस दम हुक … more →
sarhashmi wrote 2 years ago: कौन गुज़रा है तमन्नाओं की महफ़िल के क़रीब आज क्यों होती है रह रह के कसक दिल के क़रीब राह्ब … more →