अब न वो रौनक़, न वो जाहो जलाले ईद है अज़मते रफ़्ता का शाहिद ख़ुद हिलाले ईद है भूल कर शिकवे गिले,हर इक गले मिलने लगा जुड़ गए टूटे हुए दिल , यह कमाले ईद है ग… more →
साहिर हाशमी की शाएरीsarhashmi wrote 1 year ago: अब न वो रौनक़, न वो जाहो जलाले ईद है अज़मते रफ़्ता का शाहिद ख़ुद हिलाल … more →
sarhashmi wrote 2 years ago: कौन गुज़रा है तमन्नाओं की महफ़िल के क़रीब आज क्यों होती है रह रह के कसक दिल के क़रीब राह्ब … more →