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Blogs about: Sahity

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भर्तृहरि नीति शतक-धन की ऊष्मा से रहित मनुष्य क्या रह जाता है (heat of money-hindu sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  ————————— … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, अध्यात्म, editoriyal, Internet, dohe, bharat, सन्देश

भर्तृहरि नीति शतक-पैसा खत्म होने पर आदमी में जोश नहीं रहता (heat in money-hindi massege)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि  ————————— … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, India, सूचना, अनुभूति

अवध के किसान नेता की गिरफ्तारी पर

loksangharsha wrote 2 months ago: “गाँधी जी ने तुंरत माइक संभाल लिया । आप लोग शांत रहिये । बाबा रामचंद्र की गिरफ्तारी हुई है , ज … more →

कर्मयोग की फिलॉसफी

loksangharsha wrote 2 months ago: “उनका पूरा कर्मयोग सरकारी स्कीमों की फिलॉसफी पर टिका था । मुर्गीपालन के लिए ग्रांट मिलने का नि … more →

गुस्सा मजहब का गरीबी का

loksangharsha wrote 2 months ago: “…मुसलमान ने हिन्दुओं को लूटा है…पर हिन्दू सैकडों वर्ष से इन लोगो को लूटते, निचोड़ … more →

तोरे पकिस्तान का का हाल है ?

loksangharsha wrote 2 months ago: “काहे भइया , तोरे पकिस्तान का का हाल है ?” “वह तो बन रहा है ।” ” काहे … more →

ठाकुर का क्रिया-करम

loksangharsha wrote 3 months ago: “यह तो पाँच ही हैं मालिक ।” “पाँच, नही, दस हैं। घर जाकर गिनना ।” “नही … more →

भर्तृहरि शतक-बुरे संस्कार बुढ़ापे तक साथ रहते हैं

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— तानींद्रियाण्यविकलानि तदेव ना … more →

Tags: hindi journlism, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindu dharm, hindu life, Hindu culture

अपने को बैचेन कर शान्ति ढूँढने जाते-हिन्दी शायरी 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चलने को ताज महल भी चल जाता है हिलने को कुतुबमीनार भी हिल जाता है चांद लाकर यहां भेंट किया जाता है ता … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, सन्देश, साहित्य, हिन्दू

संत कबीर वाणी:विषयी लोग दीप और संत हीरे समान होते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: दीपक सुन्दर देखि करि, जरि जरि मरे पतंग बड़ी लहर जो विषय की, जरत न मोरे अंग संत शिरोमणि कबीरदास जी कहत … more →

Tags: आलेख, अध्यात्म, alekh, abhivyakti, adhyatm, editoriyal, Internet, Kabir, Kavita

चाणक्य नीति:शास्त्रों की निंदा करने वाले अल्पज्ञानी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.आकाश में बैठकर किसी से वार्तालाप नहीं हो सकता, वहां कोई किसी का संदेश वाहक न जा सकता है और न वहां … more →

Tags: आलेख, अध्यात्म, अभिव्यक्ति, hindi, jagran, alekh, adhyatm, editoriyal, Internet

क्रिकेट मैच में एक्शन का सीन-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बगल में अखबार दबाकर घर आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापु तुमने पहले अखबारों  और अब ब्लाग पर क्रिकेट पर … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, चिंतन, संपादकीय, अभिव्यक्ति, hindi, alekh, abhivyakti, adhyatm

धोनी कप्तान की तरह पेश आयें-a article in hindi on cricket

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: धोनी कप्तान की तरह पेश आयें एक दिवसीय मैचों के श्रंखला में आस्ट्रेलिया ने भारत को हराकर यह सिद्ध कर … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, संपादकीय, अध्यात्म, abhivyakti, शब्द, साहित्य, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

वेलेंटाइन डे और भारतीय संस्कृति-hindi article

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल एक टीवी चैनल पर प्रसारित खबर एक खबर के अनुसार सऊदी अरब में वेलेंटाइन डे पर उसे मनाने से रोकने के … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, अभिव्यक्ति, hindi, alekh, abhivyakti, editoriyal, Friends, dohe

फ़िर भी लिखता रहूँगा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अब धीरे-धीरे यह समझ में आ रहा है कि ब्लॉग बनाना और लिखना वैसे ही है जैसे किसी शो के लिए एस.एम् एस. क … more →

Tags: abhivyakti, alekh, arebic, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, शब्द, संपादकीय, सन्देश

कभी कभी खामोशी भी बहुत भली

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब कभी में चौपालों पर लिखता हूँ तो ऐसा लगता है कि कुछ लोग नहीं चाहते कि मैं वहाँ कुछ लिखूं. कल एक चि … more →

Tags: हिन्दी, आलेख, संपादकीय, hindi, alekh, abhivyakti, editoriyal, Internet, Friends

हिन्दी के ठेकेदार- हास्य-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर एकछत्र राज्य की कोशिश ने कुछ लोगों को अंधा बना दिया अपने दोस्त लेखकों की भीड़ जुटाकर सम् … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, hindi, jagran, abhivyakti, editoriyal, Internet, Kavita, Friends

सपने सिर्फ सपने होते-हिन्दी साहित्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सपने में जब खोये रह्ते कभी पूरी होंगे यही सोचकर बहुत कुछ सहते जब होता है हकीकतों की तपिश से सामना तब … more →

Tags: हिन्दी, चिंतन, अभिव्यक्ति, hindi, jagran, abhivyakti, Kavita, Friends, Anubhuti

सत्य से जितनी दूर जाओगे-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सत्य से जितनी दूर जाओगे भ्रम को उतना ही करीब पाओगे खवाब भले ही हकीकत होने लगें सपने चाहे सामने चमकने … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, hindi, jagran, abhivyakti, Internet, Kavita, Friends, Anubhuti


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