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	<title>sainik &amp;laquo; WordPress.com Tag Feed</title>
	<link>http://wordpress.com/tag/sainik/</link>
	<description>Feed of posts on WordPress.com tagged "sainik"</description>
	<pubDate>Sun, 07 Sep 2008 22:08:12 +0000</pubDate>

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	<language>en</language>

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<title><![CDATA[आगरे के अखबार]]></title>
<link>http://lalloo.wordpress.com/?p=12</link>
<pubDate>Mon, 24 Mar 2008 00:05:45 +0000</pubDate>
<dc:creator>lalloo</dc:creator>
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<description><![CDATA[हीरानन्द सच्चिदानन्द वात्सायन अज्ञे]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>हीरानन्द सच्चिदानन्द वात्सायन अज्ञेय की पत्रकारिता को को आप दिनमान से जानते हैं. लेकिन क्या आप बता सकते हैं अज्ञेय आगरे के किस अखबार से जुड़े रहे थे?</p>
<p>वो कौन सा अखबार था जिसके जवाहरलाल नेहरू, आचार्य जेबी कृपलानी जैसी हस्तियां मात्र संवाददाता के तौर पर जुड़ी हुईं थीं?<!--more--></p>
<p>उस अखबार का नाम था<b> सैनिक</b> और ये अखबार आगरे से निकला करता था.  इसे <b>पंडित कृष्णदत्त पालीवाल</b> अपने जुझारू तेवरों से निकाला करते थे.  आजादी की लड़ाई में पंडित कृष्णदत्त पालीवाल कई बार जेल गये.  सैनिक की प्रेस जब्त हुई लेकिन अखबार बंद होकर निकलता रहा. इसका संपादकीय पन्ने पर लिखा रहता था<br />
<b>कमर बांध कर अमर समर में नाम करेंगे<br />
सैनिक हैं हम विजय स्वत्व संग्राम करेंगे.</b></p>
<p>आजादी मिलने तक तो ये अखबार बुलंदियों पर रहा लेकिन जब आजादी मिली तो  पंडित कृष्णदत्त पालीवाल कांग्रेसी होने के कारण सत्ता में शामिल हो गये और सैनिक ने अपनी जुझारूपन खो दिया.  और ये अखबार इतिहास के पन्नों में समा गया.</p>
<p><b>उजाला</b><br />
उजाला सैनिक की टक्कर का अखबार था और इसे आगरे से गणपत चंद्र केला निकालते थे.  ये आगरे का सबसे विश्वसनीय अखबार माना जाता था.  सैनिक जहां राष्ट्रीय़ समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करता था, उजाला स्थानीय मुद्दे भी उठाया करता था.  अमर उजाला की शुरूआत करने वाले<b> डोरीलाल अग्रवाल</b> भी इसी अखबार में काम करते थे.  सिर्फ डोरीलाल अग्रवाल ही नहीं उनके पिताजी भी इसी अखबार मे काम करते थे. बाद मे डोरीलाल अग्रवाल और कैला परिवार में कुछ विवाद हुआ और डोरीलाल अग्रवाल ने अमर उजाला की शुरूआत की.</p>
<p><b>अमर उजाला </b><br />
अमर उजाला की शुरूआत डोरीलाल अग्रवाल और मुरारीलाल माहेश्वरी ने मिलकर की थी.  डोरीलाल अग्रवाल ने अपने उजाला के अनुभव यहा दोहराये यानी <b>राष्ट्रीय बातों के साथ साथ स्थानीय बाते </b>भी उतनी प्रमुखता से उठाना.  देखते ही देखते अमर उजाला, उजाला से आगे निकल गया और थोड़े दिन बाद इसने सैनिक को भी पीछे छोड़ कर आगरे का सर्वप्रमुख अखबार बन गया.</p>
<p><b>आज का हंगामा</b><br />
आगरे में इन सब अखबारों के अतिरिक्त एक और  अखबार था इसका नाम था आज का हंगामा.  इसका मुख्य विक्रय बिन्दु (USP)  था <b>रोचक फीचर सामग्री और ब्रेकिग न्यूज</b>.  ये रोचक फीचर सामग्री और ब्रेकिग न्यूज को अपनी सुर्खियों में पेश करता था और अपनी सुर्खियों की वजह से ही बिक जाया करता था. सैनिक और उजाला अखबार जहां सुबह के अखबार थे आज का हंगामा सुबह से लेकर शाम तक बिकता रहता था. आज के हंगामा के अधिक लोकप्रिय न होने के कारण ये था कि इस तरह के अखबार में ग्राफिक्स अधिक होने चाहिये थे लेकिन उस समय ग्राफिक्स पेश करने की तकनीक उन्नत नहीं थी.</p>
<p>आगरे के इन तीनों अखबारों में आज की पत्रकारिता के मूल मंत्र समाये हुये थे जुझारूपन, स्थानीय मुद्दे और रोचक फीचर सामग्री व ब्रेकिंग न्यूज.</p>
<p><b>लेकिन क्या आपको नहीं लगता कि आजके अखबारों से जुझारूपन एकदम गायब हो गया है?</b></p>
<p>Agra Newspapers, AAj ka Hungama, Agra Journalism, Amar Ujala, Dori Lal Agarwal, Ganpati Chandra Kela, Krishna Dutt Paliwal, Murari Lal Maheshwari, Sainik, Ujala</p>
]]></content:encoded>
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<title><![CDATA[अमर शहिद-एक सलामी ]]></title>
<link>http://mehhekk.wordpress.com/2007/12/23/%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a6-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%80/</link>
<pubDate>Sun, 23 Dec 2007 15:06:22 +0000</pubDate>
<dc:creator>mehhekk</dc:creator>
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<description><![CDATA[अमर शहिद-एक सलामी
बरस पर बरस बीत गये
गा]]></description>
<content:encoded><![CDATA[<p>अमर शहिद-एक सलामी</p>
<p>बरस पर बरस बीत गये<br />
गाँव की मिट्टी को छुए<br />
जब से सैनिक का ध्ररा भेष<br />
अपना गाँव है सारा देश</p>
<p>                                        कभी ठंड में ठिठुरते सिकुड़ते<br />
                                        कभी महीनो सागर में तैरते<br />
                                        कभी घने जंगल में भटकते<br />
                                        रक्षा का फ़र्ज़ निभाते रहते</p>
<p>एक बार जो ठान लेते<br />
पीछे मुड़कर नही देखते<br />
आगे आगे बढ़ते जाते<br />
कदम से कदम मिलाकर चलते</p>
<p>                                      जी जान से जंग लढ़े है<br />
                                      कोई गीला शिकायत ना करे है<br />
                                      दुश्मन पर टूट पड़े है<br />
                                     खुदकी भी परवा ना करे है</p>
<p>घर की याद उन्हे भी आती होगी<br />
उनकी आँखे भी नम होती होगी<br />
दो पल उन यादो को संजोकर<br />
नयन <span>पोंछ</span> मुस्कुरा पड़े है</p>
<p>                                       दुश्मन की गोली सिने पर खाई<br />
                                       कतरा कतरा लहू है बहता<br />
                                       आखरी लम्हो में भी कहता<br />
                                       विजयी हो मेरी भारत माता</p>
<p>उनके लिए हमारे नयन भरे है<br />
देश के लिए जो दीवाने हुए है<br />
उन्हे हाथ हमारे,सलामी करते<br />
जिनकी वजह से हम महफूज़ रहते</p>
<p>                                         भारत मा का भी हृदय हिलता है<br />
                                         जब उसका कोई बेटा गिरता है<br />
                                         मर कर भी जो अमर रहता है<br />
                                         ज़माना उन्हे शहिद कहता है.</p>
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