हसरतो के कमल आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं मैं | नींद में जब सोई हुई थी,सपनो में खोई हुई थी कोई अजनबी दबे पाव आया,उलझी लटो को सुलझाया उसके… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: हसरतो के कमल आओ आओ सखियों आओ,कुछ राज़ बताना चाहूं मैं दिल की बगिया में अब के ,नये गुल खिलाना चाहूं … more →
mehhekk wrote 2 years ago: सोलहवा सावन रिमझिम खनकती बूँदे , जब आंगन में आती है उन भीगे लम्हो को , संग अपने लाती है | बचपन की ला … more →