हज़ूर आपका भी एह्तराम करता चलूं.. इधर से गुज़रा था.. सोचा सलाम करता चलूं.. निगाह-ए-दिल की येही आखिरी तमन्ना है.. तुम्हारी ज़ुल्फ़ के साये मे शाम करता चलूं.. हज़ूर आपका भी एह्तराम करता चलूं.. उन्हे येह ज़िद … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: हज़ूर आपका भी एह्तराम करता चलूं.. इधर से गुज़रा था.. सोचा सलाम करता चलूं.. निगाह-ए-दिल की येही आखिरी त … more →