उनके साथ गुजरे दिनों की याद पल पल सताती रही ख्वाबों में कई बार चेहरा आता और जाता रहा जब वह सामने आये तो हम भूल गये उनकी यादों को सच में उनको सामने देखकर यूं लगा कि उनके दिल में हमारे लिये जज्बात ऐसे न… more →
****दीपकबापू कहिन**** ****Deepak Bharatdeep's hindi patrika****दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: रहिमन राम न उर धरै, रहत विषय लपटाय पसु खर खात सवाद सों, गुर बुलियाए खाय कविवर रहीम कहते है कि भगवान … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको माना था सरताज वह असलियत में सियार निकल आये भरोसा किया था जिन पर वह मतलब निकालकर होशियार कहलाये … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उनके साथ गुजरे दिनों की याद पल पल सताती रही ख्वाबों में कई बार चेहरा आता और जाता रहा जब वह सामने आये … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जैसे ही कवि ने कहा ”अब मैं आपको अपनी नई कविता ‘प्यार भरा ख़त’ सुनाऊंगा लिफाफे के र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लाग/पत्रिका लिखने का मजा तभी है जब उसके साथ पाठकों के आने की सूचना देने वाला काउंटर हो। अगर बहुत स … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अक्लमंदों की महफिल से इसलिये ही जल्दी बाहर निकल आये सभी के पास था अपनी शिकायतों का पुलिंदा किसी के प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन से कहां रहीम प्रभु, दृग सों कहां दीवान देखि दृगन जो आदरै, मन तोहि हाथ बिकान कविवर रहीम कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जिनको माना था सरताज वह असलियत में सियार निकल आये भरोसा किया था जिन पर वह मतलब निकालकर होशियार कहलाये … more →