Blogs about: Sampadkeeya

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ब्लोग लिखते हुए उठने लगते हैं कई संशय-आलेख 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैं यह पोस्ट पहले भी लिखना चाहता था पर रोमन लिपि में हिंदी लिखना इतना कठिन लगता कि मेरी मनस्थित … more →

Tags: arebic, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भारत, शब्द, संपादकीय, समाज, साहित्य

पहले आतंकवाद आया कि पर्यावरण प्रदूषण 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पहले इस नई दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण फैलना शुरू हुआ या आतंकवाद? यह प्रश्न ऐसा ही है कि पहले मुर् … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, आतंकवाद, आलेख, चिन्तन, दीपक भारतदीप, पर्यावरण, बुद्धिजीवी, संपादकीय

क्रिकेट में संयत व्यवहार रखना आवश्यक 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: भारत और आस्ट्रेलिया की बीच हाल ही में संपन्न श्रंखला में आस्ट्रेलिया के खिलाड़ी साइमंड पर भारतीय … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब, विचार, साहित्य, हिंदी साहित्य, bharat

आईने में बदहवास दीपक बापू

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: (यह व्यंग्य कविता काल्पनिक है और इसका किसी घटना या व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है) अपने आईने में हमार … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आचरण, इंडिया, कविता, चरित्र, चिन्तन, ताल-बेताल, दृष्टिकोण

हर चमकने वाली चीज हीरा नहीं होती

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: क्रिकेट,फिल्म,राजनीति और और पत्रकारिता का क्षेत्र समाज में आकर्षण का केंद्र होते हैं । यही नहीं जिन … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आचरण, इंडिया, कविता, गीत, चिन्तन, ताल-बेताल, दर्द बांटते चलो

पैसा और सुख -एक सस्मरण

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हमारे देश के अनेक महापुरुष कह चुके हैं कि जीवन अपने आप में एक मृग तृष्णा है । और ऐसा नहीं है कि हमा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आचरण, इंडिया, कविता, गीत, चरित्र, चिन्तन, दृष्टिकोण

हकलाते हुए लिखना जारी है

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपने बारे में मुझे दो बातें पता है कि मेरी बुधिद एकदम मन्द है और दूसरा यह कि इस कारण हादसे होंगे ही … more →

Tags: Blogroll, hindi, Global Dashboard, inglish, अभिव्यक्ति, Thought, meadia, हास्य व्यंग्य, India

मन, बुध्दी और अंहकार पर रखें अपनी नज़र

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:  हमारा शरीर पांच तत्वों-पृथ्वी, वायु, आकाश, जल और अग्नी से मिलाकर बना है यह सब जानते है पर इनकी प्रक … more →

Tags: आचरण, दृष्टिकोण, बिंब-प्रतिबिंब, विचार, विश्वास, संपादकीय, सूचना, Blogroll, Global Dashboard

अंतर्मन और अंतर्दृष्टि

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जहाँ तक जायेगी तुम्हारी दृष्टि वहीं तक देख पाओगे वैसा ही दिखाई देगा जैसा देखना चाहोगे चक्षुओं का काम … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, इंडिया, कविता, गीत, चरित्र, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, नज़रिया

अपने आंसू धीरे-धीरे बहाओ

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शिष्य के हाथ से हुई पिटाई गुरुजी को मलाल हो गया जिसको पढ़ाया था दिल से वह यमराज का दलाल हो गया गुरु … more →

Tags: अभिव्यक्ति, इंडिया, कविता, दर्द बांटते चलो, दृष्टिकोण, नज़रिया, भारत, यकीन, रात-बेरात

गर्मी में ठण्डा और गले से पंगा

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: गर्मी में ठंडा यानी अपने गले से पंगा। मजाक लगने वाली यह बात मेरे लिए एकदम सही बैठती । ऐसा कई बार हुआ … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दर्द बांटते चलो, विचार, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, Blogroll, Global Dashboard, glogbal dashborad, hindi

मानव भेष में पशुता दिखाने वालों को पाशविक सजा दें

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मैं पिछले कई दिनों से टीवी पर जब किसी लडकी पर किसी युवक द्वारा तेज़ाब फैंकने की घटना का समाचार देखता … more →

Tags: संपादकीय, Blogroll, glogbal dashborad

माया का वरदहस्त, दर्शन का पहला हक:व्यंग्य व चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                                     अगर कोइ दौलत  और शौहरत  कोई शख्स किसी मंदिर के दर्शन करने जाता ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, इंडिया, दृष्टिकोण, नज़रिया, भारत, यकीन, रात-बेरात, लम्हे, विचार


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