श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भावार्थ-श्रीगीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि अपने धर्म से पराया धर्म श्रेष्ठ लगता है तब उसको कभी श… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 week ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्। खग चीतफल वृक्षं भुक्त्वा चाऽभ्यागता गृहम्।। हिंदी मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नाऽकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्यद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वग्र्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत्।। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कविवर रहीम कहते हैं कि ——————- वहै प्रीति नहिं रीति वह, नहीं पाछ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिय से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अलिरय नलिनीदलमध्यगः मलिनीमकरंदमदालसः। विधिवशात्परदेशमुपागतः कुटजपुष्परसं बहु मन्यते।। हिन्दी में भाव … more →