यदीच्छसि वशीकर्तंु जगदेकेन कर्मणा। परापवादसस्येभ्यो गां चरंन्तीं निवारथ।। हिंदी में भावार्थ-नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि यदि कोई मनुष्य अपने किसी एक काम से ही सारी पृथ्वी पर अपना नाम करना चाहता है त… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन निज मन की, बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि अठिलैह लोग सब, बाटि न लैहैं न कोय।। कविवर रहीम कहते हैं … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्। न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।। हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गूढ़मैथुनचरित्वं च काले काले संग्रहम्। अप्रमत्तमविश्वासं पंच शिक्षेच्च वायसात्।। हिंदी में भावार्थ-छि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यदीच्छसि वशीकर्तंु जगदेकेन कर्मणा। परापवादसस्येभ्यो गां चरंन्तीं निवारथ।। हिंदी में भावार्थ-नीति विश … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: न नटा न विटा न गायकाः न च सभ्येतरवादचंचवः। नृपमीक्षितुमत्र के वयं स्तनभारानमिता न योषितः।। हिंदी में … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी। स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।। हिंदी मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →