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Blogs about: Sandesh

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रहीमदास के दोहे-अपने मन की बात दूसरे को न बताएं (apne man ki bat-rahim das ke dohe)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: रहिमन निज मन की, बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि अठिलैह लोग सब, बाटि न लैहैं न कोय।। कविवर रहीम कहते हैं … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, adhyatm, जागरण, धर्म, संदेश

हिंदी अध्यात्म सन्देश-बुरे काम से दूर होकर ही अच्छाई समझना संभव (hindu adhyatm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्। न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।। हिंदी में भावार् … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, हिन्दी

संत कबीर के दोहे-कष्ट और कलह की जड़ है गाली देना (gali dena galat-kabir ke dohe

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आवत गारी एक है, उलटत होय अनेक। कहैं कबीर नहिं उलटिये, वही एक की एक।संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं क … more →

Tags: अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कबीर, कला, मस्तराम, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी

चाणक्य दर्शन-जीवन में जागरुकता आवश्यक (chankya darshan in hindi)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गूढ़मैथुनचरित्वं च काले काले संग्रहम्। अप्रमत्तमविश्वासं पंच शिक्षेच्च वायसात्।। हिंदी में भावार्थ-छि … more →

Tags: अध्यात्म, आलेख, कला, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi Personal

चाणक्य नीति-अपने मुख में कटु शब्दों की खेती न करें

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यदीच्छसि वशीकर्तंु जगदेकेन कर्मणा। परापवादसस्येभ्यो गां चरंन्तीं निवारथ।। हिंदी में भावार्थ-नीति विश … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आध्यातम, आलेख, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज

भर्तृहरि नीति शतक-प्रतिष्ठा बनाती है घमंड के बुखार का शिकार (bhartrihari shatak-ghamand ka bukhar)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: न नटा न विटा न गायकाः न च सभ्येतरवादचंचवः। नृपमीक्षितुमत्र के वयं स्तनभारानमिता न योषितः।। हिंदी में … more →

Tags: Deepak bharatdeep, Deepak bapu, हिंदी, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, हिंदी पत्रिका, अनुभूति, सूचना, hindu

दूसरे की दौलत को धूल समझें-चाणक्य नीति (dusre ki daulat ko dhool samjhen-chankya niti2 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: यो मोहन्मन्यते मूढो रक्तेयं मयि कामिनी। स तस्य वशगो मूढो भूत्वा नृत्येत् क्रीडा-शकुन्तवत्।। हिंदी मे … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चाणक्य नीति, ज्ञान, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogroll, Deepak bapu

श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll


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