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श्रीगीता संदेश-गैर धर्म गुणवान होने पर भी दु:खदायी (shri gita sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वधर्मे निधनं श्रेयः परधर्मो भयावहः।। हिंदी में भाव … more →

Tags: आलेख, मस्तराम, संस्कार, समाज, साहित्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Blogroll

चाणक्य नीति-बुरे संस्कार वालों के साथ बैठकर खाना भी न खाएं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ——————- अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्र … more →

Tags: अर्थशास्त्र, आलेख, संस्कार, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

मनुस्मृति- कठिन जगह पर जाने से बचें

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते हैं कि —————– अधितिष्ठेन केशांस्तु न भस्मास्थिक … more →

Tags: hindi journlism, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi bhasakar, hindi jagran

चाणक्य नीति-दूसरों का आसरा लेने वाले जल्दी तबाह हो जाते हैं 4 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: निर्धनं पुरुषं वेश्या प्रजा भग्नं नृपं त्यजेत्। खग चीतफल वृक्षं भुक्त्वा चाऽभ्यागता गृहम्।। हिंदी मे … more →

Tags: आलेख, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, Hindi Blogging, Hindi Darshan, hindi internet, hindi megzine

मनुस्मृति:आयु,सफ़ेद बाल और धन से ज्ञान और आचरण का महत्त्व

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मनु महाराज कहते है कि ————— न हायनैर्न पालितैर्न वित्तेन न बंधुभिः । ऋ … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, समाज, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

मनुस्मृतिः हिंसा से कोई भी उद्देश्य पूरा नहीं होता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: नाऽकृत्वा प्राणिनां हिंसां मांसमुत्यद्यते क्वचित्। न च प्राणिवधः स्वग्र्यस्तस्मान्मांसं विवर्जयेत्।। … more →

Tags: abhivyakti, adhyatm, अध्यात्म, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, हिन्दी, हिन्दू, Deepak bharatdeep

रहीम दास के दोहे:स्वार्थ के कारण हुआ प्रेम घटता जाता है 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कविवर रहीम कहते हैं कि ——————- वहै प्रीति नहिं रीति वह, नहीं पाछ … more →

Tags: आलेख, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, धर्म, मस्त राम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Family, hindi article

संत कबीर दास वाणीः हृदय की बात स्वत: जाने वही है सच्चा प्रेम

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: यह तत वह तत एक है, एक प्रान दुइ गात अपने जिय से जानिये, मेरे जिय की बात संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते … more →

Tags: आलेख, कला, हिंदी पत्रिका, हिन्दी, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep, hindi bharat, Hindi Darshan

चाणक्य नीति-भंवरे को कमल का महत्व विदेश में पता लगता है

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अलिरय नलिनीदलमध्यगः मलिनीमकरंदमदालसः। विधिवशात्परदेशमुपागतः कुटजपुष्परसं बहु मन्यते।। हिन्दी में भाव … more →

Tags: hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi megzine, Deepak bharatdeep, Deepak bapu, hindi litreture, inglish, हिन्दी


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