मूरति धरि धंधा रखा, पाहन का जगदीशमोल लिया बोलै नहीं, खोटा विसवा बीस संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं कि लोग मूर्ति का भगवान बनाकर उसकी सेवा करने के बहाने अपना धंधा करते हैं, पर वह मोल लिया ईश्वर बोलता… more →
दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिकाwrote 8 months ago: कहं लगि आरती दास करेंगे, सकल जगत जाकी जोत विराजे, सात समुद्र जाके चरणनि बसे, कहा भये जल कुम्भ भरे हो … more →
wrote 8 months ago: गंगा माता जी की आरती ॐ जय गंगे माता श्री जय गंगे माता… जो नर तुमको ध्याता मनवांछित फल पाता … more →
wrote 8 months ago: भारतीय ज्योतिष में नामकरण संस्कार को सोलह संस्कारों में से एक संस्कार के रुप में महत्ता प्राप्त है. … more →
wrote 1 year ago: उस दिन एक … more →
wrote 1 year ago: हमेशा हर बार की तरह आज भी मैं अपनी माटी और माँ की शरण में अपने गांव और घर पहुंचा हूँ पुनः अपने भीतर … more →
wrote 2 years ago: आधुनिक प्रचार माध्यमों के विज्ञापनों से … more →
wrote 2 years ago: आधिव्याधिविपरीतयं अद्य श्वो वा विनाशिने। कोहि नाम शरीराय धम्मपितं समाचरेत्।। हिन्दी में भावार्थ-तमाम … more →
wrote 3 years ago: मूरति धरि धंधा रखा, पाहन का जगदीशमोल लिया बोलै नहीं, खोटा विसवा बीस संत शिरोमणि कबीरदास जी कहते हैं … more →
wrote 3 years ago: आधिव्याधिविपरीतयं अद्य श्वो वा विनाशिने।कोहि नाम शरीराय धम्मपितं समाचरेत्।।हिन्दी में भावार्थ-तमाम त … more →
wrote 3 years ago: उत्तमैरुत्तमैर्नित्यं संबंधनाचरेत्सह।निनीषुः कुलमुत्कर्षमधमानधर्मास्त्यजेत्।हिन्दी में भावार्थ-अपने … more →
wrote 3 years ago: तेहि प्रमाण चलिबो भलो, जो सब दिन ठहराइ। उमड़ि चलै जल पार तें, जो रहीम बढ़ि जाइ।। कविवर रहीम का कहना है … more →
wrote 3 years ago: > सर्वे परवशं दुःखं सर्वमात्मवशं सुखम्।एतद्विद्यात्समासेन लक्षणं सुखदुःखयोः।।हिन्दी में भावार्थ-ज … more →
wrote 3 years ago: > ज्यों नाचत कठपूतरी, करम नचावत गातअपने हाथ रहीम ज्यों, नहीं आपुने हाथ कविवर रहीम कहते हैं कि जैस … more →
wrote 3 years ago: ‘निरभउ निरंकार सच नाम।जा का कीआ सगल जहान।।हिन्दी में भावार्थ-निर्भय निरंकार का नाम ही सच है। उसी परम … more →
wrote 3 years ago: काहू को नहिं निन्दिये, चाहै जैसा होय।फिर फिर ताको बन्दिये, साधु लच्छ है सोय।। … more →
wrote 3 years ago: शान्तोदिताव्यपदेश्यधर्मानुपाती धर्मी। हिन्दी में भावार्थ-जो मनुष्य अतीत, वर्तमान और भविष्य का विचार … more →
wrote 3 years ago: अंतर्गतमलो दृष्टस्तीर्थस्नानशतैरपि। न शुध्यति यथा भाण्डं सुराया दाहितं च यत्।। हिंदी में भावार्थ-जिस … more →
wrote 3 years ago: संकलक एवं संपादक-दीपक भारतदीप,Gwalior http://anantraj.blogspot.com ———— … more →
wrote 3 years ago: सीखे सुनै विचार ले, ताहि शब्द सुख देयबिना समझै शब्द गहै, कछु न लोहा लेय … more →