दुहरी होने लगी कमर | कन्धों पर भारी है सर | राम-राम आदाब बंद हैं धर्मों में बँट गया शहर | शाम हुई घर जाना है पर कैसा औ’ किसका घर | क्यूँ हर रात सताता है रोज़ सुबह होने का डर | मौसम क्या रुक पाय… more →
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