जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं जो नहीं जानते हैं ज़रा ज़्यादा जानते हैं जो ढीठ बनके बैठा हुआ है मेरी जानिब वो नहीं जानता है कि बहुत ढीठ है ‘विनय’ यह एक दिन न ढलेगा, ढलेंगे लाखों सूरज दे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जो मुझको जानते हैं ज़रा कम जानते हैं जो नहीं जानते हैं ज़रा ज़्यादा जानते हैं जो ढीठ बनके बैठा हुआ है म … more →