“मंजिलें भी उसकी थीं, रास्ते भी उसके थे , मैं तनहा था , काफिले भी उसके थे , साथ साथ चलने की सोच भी उसकी थी, फिर रास्ते बदलने का फ़ैसला भी उसका था, आज क्यूँ तनहा है ये … more →
Gaurav's Notesmehhekk wrote 1 year ago: ताश सी ज़िंदगी //1// लगती है हमे कभी कभी ये ज़िंदगी ताश की गडडी सी इंसान सब ताश के पत्ते खेल खेलता व … more →
Gaurav Mishra wrote 3 years ago: “मंजिलें भी उसकी थीं, रास्ते भी उसके थे , मैं तनहा था , काफिले भी उसके थे , साथ साथ … more →