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दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते9 comments

विनय wrote 4 months ago: दाग़े-शबे-हिज्राँ बुझाये नहीं बुझते आँसू बहते हैं इतना छुपाये नहीं छिपते होता है कभी, शाम आती है चाँ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, चाँद, Heart, दिल, शाम, ख़ुदा, Separation, तस्व्वुर, मरासिम

ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए13 comments

विनय wrote 5 months ago: ख़ाब सब ख़ाब हैं आँखों में बिखरे हुए दिल के कोने-कोने तक छितरे हुए वह अब कहाँ बाक़ी जो था मुझमें मैं … more →

Tags: मेरा गीत, आँखें, इश्क़, कोना, ख़ाब, घाव, चिन्गारी, जुगनू, दिल

बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म

विनय wrote 11 months ago: बारहा पिरोये हैं कई ज़ख़्म साँस के एक ही धागे में टुकड़े-टुकड़े बिखरी हुई ज़िन्दगी बहुत नज़दीक़ लगी है त … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, ज़िन्दगी, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, साँस, Life, ज़ख़्म

हम में जीतने का हौसला है

विनय wrote 1 year ago: हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वा … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, हौसला, इश्क़, दर्द, Love, प्यार, मोहब्बत, Pain, नज़र

ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम?

विनय wrote 1 year ago: ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम? बदरा सावन बुलाये, कहाँ हो तुम? अपने हश्र तक पहुँचा ‘नज़र … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Heart, Love, सावन, प्यार, मोहब्बत, नज़र, death

ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी

विनय wrote 1 year ago: ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी और मवाद के दरिये बहेंगे हमने हमेशा ‘वफ़ा’ से लाग रखा एक दिन … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, वफ़ा, ज़ख़्म, घाव, Wound

दिल ख़ुद ख़ला है

विनय wrote 1 year ago: दिल ख़ुद ख़ला है उसमें दूसरी ख़ला क्या होगी मैंने सय्यारों की तरह भटककर देखा है इसमें दूर-दूर तक इसम … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, cheat, ज़ख़्म

आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा2 comments

विनय wrote 1 year ago: आसमाँ को आज उसका हक़ पहुँचा यह तीर जो मेरे दिल तक पहुँचा ज़ख़्म देकर जो उसका जी न भरा दिल उसका मेरे दि … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ुशी, हासिल, इश्क़, दर्द, Heart, Love, eyes, haze

इस जानिब य उस जानिब

विनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, रात, जानिब, नज़र, dream, Night, ज़ख़्म, Silence

वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है

विनय wrote 1 year ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने न … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, वक़्त, time, Reminisce, याद, दीवाना, बहार, सदा

ज़हर पीकर जीने चले2 comments

विनय wrote 1 year ago: ज़हर पीकर जीने चले कच्चे-पक्के ज़ख़्म सीने चले आँसू सूखे हुए थे पलकों से बरसते हैं सितारे सारी रात चाँ … more →

Tags: मेरा गीत, ज़िन्दगी, चाँद, इश्क़, Love, पलाश, आइना, प्यार, मोहब्बत

ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी

विनय wrote 1 year ago: ख़िज़ाँ मुस्कुराने लगी सूखे पत्ते उड़ाने लगी दरख़्त की शाख़ों पर धूप की बूँदें नहीं सूरज का दरिया है … more →

Tags: मेरा गीत, Earth, Tree, ज़िन्दगी, बूँद, चाँद, धूप, इश्क़, Love

हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे

विनय wrote 1 year ago: हम भी पागल थे ग़ैरों को अपना जानते थे रुसवा किये जायेंगे इस क़दर यह न जानते थे बेवफ़ा गर वह होता दर्द श … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Blame, Frozen, प्यार, मोहब्बत, Friendship, वफ़ा

मक़सद है मेरे पास क्या जीने को

विनय wrote 1 year ago: मक़सद है मेरे पास क्या जीने को कहाँ से लाऊँ तुम-सा बहाना जीने को साँस चलती है ज़ख़्म करते हुए कौन कब त … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Blame, प्यार, मोहब्बत, दवा, ख़ता, ज़ख़्म

दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए

विनय wrote 1 year ago: दिल के दाग़ सभी ज़ख़्म हुए वह ख़फ़ा हुआ हम ख़त्म हुए कोसूँ क्या अपनी क़िस्मत को हमें भी कुछ नये इल्म हुए … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, इश्क़, Love, Blame, सावन, प्यार, क़िस्मत, मोहब्बत

अगर आँख रोये

विनय wrote 1 year ago: अगर आँख रोये और दिल सिसकियाँ भरे तो भला बोलो आशिक़ ऐसे में क्या करे इक वो दिन था इक ये आज का दिन है म … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, eyes, Curse, ख़ुदा, मर्ज़ी, आशिक़, ख़ुश

इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं

विनय wrote 1 year ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Love, Blame, प्यार, मोहब्बत, नज़र, इम्तिहाँ, Cruelty

सड़कों के साथ चल रहा हूँ

विनय wrote 1 year ago: सौंधी हुई एक खु़शबू मेरी आँखों में आकर सो गयी है कभी भर जो आती है आँख सारा मंज़र महका देती है… … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Love, time, eyes, Moment, प्यार, मोहब्बत, निशाँ

क़तरा-क़तरा गलायेगा मेरे दिल को1 comment

विनय wrote 1 year ago: आज महसूस किया मैंने गर तुम्हें किसी और के साथ देखूँ तो मेरे दिल पे क्या गुज़रेगी कैसा महसूस करूँगा बा … more →

Tags: मेरी नज़्म, महसूस, इश्क़, दर्द, Love, डर, प्यार, मोहब्बत, Pain


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