जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे मोहब्बत सादा-सादा इक यह फ़र्द तुझ तक पहुँचे धूप सारे आलम में महकी हुई है हर-सू कि मेरे सीने की यह सर… more →
तख़लीक़-ए-नज़रSulabh wrote 4 weeks ago: By Dr.Abhay Kumar Dear folks. . This is rainy season. . . This season invites diseases like cough a … more →
विनय wrote 6 months ago: जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे … more →
विनय wrote 11 months ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
विनय wrote 11 months ago: I’m walking on the misty road but still have faith in your love this seems warm as the rising … more →
विनय wrote 1 year ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की मुझको सज़ा दे दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ हाथों की लकीरों … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी तुम घर आओ ना नाम से मुझे बुलाओ ना हमें यह वादा दे दो आओ तो फिर जाओ ना अपनी हँसी से यह घर सजा दो … more →
विनय wrote 1 year ago: शीतल जल में चंदन घुला हो ऐसी थी काया काले-काले बादलों से घनी थी ज़ुल्फ़ों की छाया क्यों जचने लगी यह बे … more →
विनय wrote 1 year ago: यह मौसम है मस्त-मस्त यह आलम है मस्त-मस्त अम्बर पे छायी काली घटा सावन बरसे कर दे मस्त यह मौसम है मस्त … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम … more →
विनय wrote 1 year ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही मगर यह दिल किसी का होना चाहे जबसे मेरी … more →
विनय wrote 1 year ago: तुझे देखा तू ही मेरी हमनशीं तुझे चाहा तू ही मेरी जान-सी तुझे देखा मैंने तुझे चाहा तुझे सिर्फ़ तू ही म … more →
jyoti78 wrote 1 year ago: Ardent passion of going high, Desire to touch the illusion of sky, Tempted to earn fame and name , R … more →
jyoti78 wrote 1 year ago: Rhythm created on water tends to kill Images of trees and sky reflected in lake Still water but, not … more →
विनय wrote 1 year ago: कभी हम मौसम थे कभी ख़ुद मौसम था सावन की चाह में इक सावन मिला तो दूसरा गया आजकल अकेला हूँ शायिर: विनय … more →
विनय wrote 1 year ago: In my old book You’re living as dry rose In my broken heart I feel you everyday too close My l … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी तुमको पाने की जुस्तजू छोड़ दी चाक़ जिगर को गरेबाँ में छिपाके हमने हसरते-रफ़ू … more →
विनय wrote 1 year ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों से झाँक रहा था छत पे था मैं और पुरवाई बह रही थी तेरा ख़्याल और … more →