Blogs about: Sep 2007

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रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, ही, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, आई, कविता, की, खुशबू, गज़ल, जैन

इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों

Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, आज, इन्सां, कविता, गये, गज़ल, जैन

नज़्म - इसी जगह

Rohit Jain wrote 1 year ago: नज़्म – इसी जगह याद है हम तुम मिले थे उस दिन इसी जगह मै खड़ा था दूर और तुम थी मेरी जगह अटका था द … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, इसी, कविता, गज़ल, जगह, जैन, नज़्म

जो हो चुका वो कभी इंतेहा नहीं होता

Rohit Jain wrote 1 year ago: हर तराशा हुआ बुत ख़ुदा नहीं होता हर आँख में दिल का आईना नहीं होता रही होंगी शायद कोई मजबूरियां उसकी व … more →

Tags: 2007 A Poetic Journey, मेरी गज़लें, 2007, इंतेहा, कभी, कविता, गज़ल, चुका, जैन

दिल को उनके आने की उम्मीद सी है

Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल को उनके आने की उम्मीद सी है कुछ करम हो जाने की उम्मीद सी है हाथ में जाम लिये बैठा हूँ आँखों से म … more →

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मुस्कुराने पर भी कर्ज़ है

Rohit Jain wrote 1 year ago: मुस्कुराने पर भी कर्ज़ है दिल को ये कैसा मर्ज़ है अश्क़ों से कहो मुँह ना फेरें इनका भी कुछ फ़र्ज़ है ये ज … more →

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अश्क़ गिनता है मेरे आज मुनाफ़े की तरह

Rohit Jain wrote 1 year ago: अश्क़ गिनता है मेरे आज मुनाफ़े की तरह ज़िंदगी आँखों से गुज़रती है जनाज़े की तरह आज वो ही दर मुझे लगता है … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, की, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

इश्क़ हर इक का हल नहीं होता

Rohit Jain wrote 1 year ago: इश्क़ हर इक का हल नहीं होता मसला हर इक सरल नहीं होता तुझको देखा तो फिर यकीं आया फूल हर इक कँवल नहीं ह … more →

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