ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ताज भी काम संतराश का ओ नाम बादशाह का मुख़्तसर सी बात है लेकिन सबूत पेश हो आजकल मोहताज हो गया है सच गवाह… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 8 months ago: ज़िंदगी है इक मुसलसल सिलसिला गुनाह का आपको दिखता नहीं तो ऐब है निगाह का आजकल के दौर की मिसाल है ये ता … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: आप भी अजीब हैं क्यूँ मेरे करीब हैं देते हैं दवा में ज़हर ये मेरे तबीब हैं तबीब == He … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: दिल जो टूटा तो बताओ के किधर जाओगे तुम भी इस राह में आखिर को बिखर जाओगे हद से हद ये ही मिलेगा मुझे चा … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: यादें बिन आये भी जब सीने में जलने लगती हैं तस्वीरें रंग बदलती हैं तन्हाई में बोलने लगती हैं तारीकी ऐ … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: कौन ये कश्ती ले उतरा तूफ़ान में इतना दम कब से आया इन्सान में वो देखता रह्ता है आसमां की तरफ़ कोई रहता … more →
Rohit Jain wrote 9 months ago: कोई भी इस जहां में ना कहीं बरबाद रहे जो जहां पर भी रहे खुश रहे आबाद रहे ना रहें मंदिरें ना मस्जिदें … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: बिखरे हुए से फूलों में तूफ़ान की खुशबू आई है इक गद्दार ग़रेबां से ईमान की खुशबू आई है हमने ये ना जाना … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इन्सां भी हो गये हैं ख़ुदा आज दोस्तों ये है मोहब्बत का सिला आज दोस्तों ना इश्क़ ना इख़लास ना उम्मीद ना … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: नज़्म – इसी जगह याद है हम तुम मिले थे उस दिन इसी जगह मै खड़ा था दूर और तुम थी मेरी जगह अटका था द … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हर तराशा हुआ बुत ख़ुदा नहीं होता हर आँख में दिल का आईना नहीं होता रही होंगी शायद कोई मजबूरियां उसकी व … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल को उनके आने की उम्मीद सी है कुछ करम हो जाने की उम्मीद सी है हाथ में जाम लिये बैठा हूँ आँखों से म … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मुस्कुराने पर भी कर्ज़ है दिल को ये कैसा मर्ज़ है अश्क़ों से कहो मुँह ना फेरें इनका भी कुछ फ़र्ज़ है ये ज … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: अश्क़ गिनता है मेरे आज मुनाफ़े की तरह ज़िंदगी आँखों से गुज़रती है जनाज़े की तरह आज वो ही दर मुझे लगता है … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: इश्क़ हर इक का हल नहीं होता मसला हर इक सरल नहीं होता तुझको देखा तो फिर यकीं आया फूल हर इक कँवल नहीं ह … more →