mehhekk wrote 1 year ago: दीदार खुश है मेरी बन्नो,आज मधुचंद्र की रात सज सवर कर बैठी है नही करती किसीसे बात कुछ भी कहो ,ग … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नयनो की जलधारा को, बह जाने दो सब कहते पर तुम इस गंगा जमुना को मेरे बाबुल कैसे सहते इसलिए छूपा रही हू … more →
mehhekk wrote 1 year ago: साथी रे मेरे हम सफ़र,मेरे हम कदम जब तेरा साथ हे यहाँ मेरे सनम,तुमसे ही हे खूबसूरत मेरा ये जहाँ सपनोस … more →