शाम से आँख में नमी सी है, आज फ़िर आपकी कमी सी है, दफ़न कर दो हमें की साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी सी है, वक्त रहता नहीं कहीं छुपकर, इसकी आदत भी आदमी सी है, कोई रिश्ता नहीं रहा फ़िर भी, एक तस्लीम लाज़… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: … more →
Amarjeet Singh wrote 2 years ago: शाम से आँख में नमी सी है, आज फ़िर आपकी कमी सी है, दफ़न कर दो हमें की साँस मिले, नब्ज़ कुछ देर से थमी … more →