फिर उसी राहगुज़र पर शायद, हम कभी मिल सकें मगर शायद, जान पहचान से क्या होगा, फिर भी ऐ दोस्त गौर कर शायद, मुन्तज़िर जिन के हम रहे उन को, मिल गए और हमसफ़र शायद, जो भी बिछडे हैं कब मिले हैं “फ़र्ज़… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 1 year ago: फिर उसी राहगुज़र पर शायद, हम कभी मिल सकें मगर शायद, जान पहचान से क्या होगा, फिर भी ऐ दोस्त गौर कर शाय … more →