Blogs about: Shaayree
दिल और दोस्ती
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हमें पूछा था अपने दिल को बहलाने के लिए … more »
हास्य कविता-बीस का नोट पचास में नहीं चलेगा
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बीस के शेर पचास में ढ़ेर जीतते हैं तो फु … more »
अपने ही लोगों की वाह-वाही चाहिए
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लिपि रोमन हो गयी है कॉमन अब इस दुनिया क … more »
चाणक्य नीति: विद्वान् के लिए कोई देश पराया नहीं
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: 1.ईर्ष्या असफलता का दूसरा नाम है। … more »
हास्य कविता -हिट- फ्लॉप के चक्कर में मत पडो
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: वह प्रतिदिन हिट होने के नुस्खे सबको बत … more »
समस्याओं के जंगल में आन्दोलन
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लोग भीड़ में जाकर जुलूस सजाते हैं चीख- … more »
समस्याओं के जंगल में आन्दोलन
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लोग भीड़ में जाकर जुलूस सजाते हैं चीख- … more »
कविता -रामजी तो घट-घट में बसते हैं
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: एक ढोंगी साधु ने भक्त से कहा ‘तुम हमे … more »
हास्य कविता -धूल का प्रतिरोध
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बहुत दिन बाद ऑफिस में आये कर्मचारी ने … more »
रामजी लगायेंगे बेडा पार-कविता
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: विश्वास धारण कर हृदय में रामजी करेंगे … more »
हास्य कविता -नैतिकता की दुहाई देना बेकार
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: अपराधियों के पुलिस मुठभेड में मारे जा … more »
हास्य कविता -घर-घर में नस्लभेद
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जनसँख्या में लड़कों के अनुपात में लड़ … more »
हास्य कविता -फ़्लाप हीरो बेच देते तेल
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: वाह रे बाज़ार तेरा खेल बैट बाल के खेल क … more »
हास्य कविता -हीरो को मिली जेल, प्रियतम प्यार में फेल
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: एक ही हीरो की फिल्म देखने और गाने सुनन … more »
हास्य कविता -बेटा हीरो या साधू बनना
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अब वह समय गया जब माँ कहती थी पढ़ जा बेटा … more »
हास्य कविता -बुद्धिजीवियों का झगडा और आम आदमी
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: ऐक बुद्धिजीवी ने दूसरे से कहा ‘मेरी … more »
यकीन और हिम्मत से डटे रहो
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दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: समझौता ग़मों से कर लो दोस्ती नगमों से … more »
चुनते हैं भाषा से शब्दों को जो फूल की तरह
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: तुम्हारे मुख से निकले कुछ प्रशंसा के … more »
माया के खेल तो बनते-बिगड़ते हैं
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: गरीब का जीना क्या मरना क्या अमीर का जी … more »
