विनय wrote 7 months ago: एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का जब तलक … more →
विनय wrote 7 months ago: उफ़! यह छाँव की उमस तौबा यह झूठे फ़साने उम … more →
विनय wrote 7 months ago: मैं तेरे इश्क़ की छाँव में जल-जलकर कितन … more →
विनय wrote 8 months ago: यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं ज … more →
विनय wrote 8 months ago: रोशनी से दीवारों के साये मिटायेंगे ढू … more →
विनय wrote 9 months ago: रोज़े - शामे - दीवाली कोई नूरे - चराग़ न … more →