दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: बीस के शेर पचास में ढ़ेर जीतते हैं तो फुलाते सीना हारें तो कहें’समय का फेर’ समझाया था क्य … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: वह प्रतिदिन हिट होने के नुस्खे सबको बताएं और शब्दों के डाक्टर कहलाये मरीज पढ़ते नुस्खा जब तक डाक्टर स … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: गरीब का जीना क्या मरना क्या अमीर का जीतना क्या हारना क्या इस जीवन को सहज भाव से वही बिता पाते हैं जो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: उगते सूरज को करें सभी नमन डूबते से कभी नजर न मिलाएं कामयाबी के शिखर पर पहुँचा आदमी अपने चारों और … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: हीरो और क्लर्क ऐक ही दिन और ऐक ही समय पर मंदिर में करने दर्शन करने पहुँचे क्लर्क तो रोज वहाँ जाक … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: माँ अपने बेटे को स्कूल की किताबें पढ़ाते-पढ़ाते जीवन की शिक्षा भी उसको देने लगी ‘बड़ों का स … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब से मोबाइल की बैटरी फ़टने की खबर आई है लोग सहमे हैं जिनके लिये मोबाइल कोई फोन नहीं बल्कि गहने हैं ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पहले छोड़ते साँप और फिर पकड़ने के लिये करते दिखते बहुत मशक़्क़त सहज काम ऐसे करते जैसे आ रही भा … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दूसरों के लिखे का करें छिद्रान्वेषण कहैं जैसा वह लिखता है वैसा खुद नही दिखता है आधा-अधूरा पढ़ें शब्द … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अपनी-अपनी सब कहैं सुने न कोई किसी की बात इससे तो अच्छा हैं हम मौन हो जाये अपने ही मन की सुने बात … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सागर की तरह मन है मेरा जब भी लहरों से खेलता है कुछ शेर ही जुबान से कहला कर दम लेता है मैं भी उसे नह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: तुम रास्ते से हट जाओ अपने ज़ज्बातों को बहकर आने दो अल्फाजों का समंदर है अन्दर उसे उफनते आने दो कहने क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: चारों और वृक्षों से घिरा खिर्की पर है सुन्दर कांच लगा चिकने पत्थर का फर्श रोशनी से चमकते हुए कमरे सभ … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आदमी और कुत्ते पर कविता सुनाकर वह लोगों को हंसाते हैं अपने नाम के आगे हंसी के बादशाह की पदवी लगाते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक दिन की बारात शादी की एक रात आदमी अपनीसारी जिन्दगी की कमाई दाव पर लगाता है दूसरों को खुश कर अपनी ख … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शिष्य के हाथ से हुई पिटाई गुरुजी को मलाल हो गया जिसको पढ़ाया था दिल से वह यमराज का दलाल हो गया गुरुज … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: विश्वास से अविश्वास प्यार से नफरत ईमान से बेईमानी पैदा होनी है अगर तुम में यह सब नहीं है चाहे कितने … more →